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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह०५ / 15

आरती की श्री जम्भ गुरू देवापार न पावै बाबो अलख अभेवा

आरती की श्री जम्भ गुरू देवा, पार न पावै बाबो अलख अभेवा । पहली आरती परम गुरू आये, तेज पुंज काया दर्शाये। दूसरी आरती देव विराजे, अनन्त कला सत्गुरू छवि छाजे । तीसरी आरती त्रिशूल ढ़ापे, खुध्या तृष्णा निंद्रा नहीं व्यापै। चौथी आरती चहुं दिश परसे, पेट पूठ नहीं सन्मुख दरसे । पांचवीं आरती केवल भगवन्ता, शब्द सुण्या जो जन पर्यन्तां । ऊधोदास जी आरती गावे, श्री जम्भ गुरू जी को पार न पावै ।