मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान

साखी संग्रह

साखियाँ जाम्भोजी के हजूरी भक्तों अर्थात् उनके समकालीन भक्तों, तथा उत्तरवर्ती भक्तों, अर्थात् जाम्भोजी के पश्चात् हुए भक्तों द्वारा रचित हैं। इनमें जाम्भोजी के जीवनकाल में उनके साथ रहने वाले भक्त भी सम्मिलित हैं।

यहाँ उपलब्ध साखियाँ स्वामी श्री कृष्णानंद आचार्य द्वारा संकलित एवं भावार्थित ग्रंथ ‘साखी भावार्थ प्रकाश’ से ली गई हैं।

156 साखियाँ48 कवि

156 साखियाँ

1कवि: अज्ञात कवि (प्रारम्भिक हजूरी साखियां)तारण हार थलासिर आयो, जे कोई तिरै सो तिरियो जीवने2कवि: अज्ञात कवि (प्रारम्भिक हजूरी साखियां)विष्णु बिसार मत जाइरे प्राणी, तो शिर मोटो दावो जीवनैं3कवि: तेजोजी चारणसाच तूं मेरा सांई, अवर न दूजा कोई4कवि: समसदीन जीसिंवरो उत्तम रो राव, सांई राजा मन जपिये5कवि: समसदीन जीमीठा तो बोलो रे भइया निवखिव चालो, ना तोड़ो गुरु से नेहा6कवि: आंछरे जीमेरे मन हुवो हुलास, संभरथलि जाइये7कवि: सुरजन जीजुमलै आवो गुरु भाइयो, सुपह करौ जे काय8कवि: शिवदास जीसांइयां जुग दातार, पांणी सूं पिण्ड करणा9कवि: अभियादीनदीन मीठो मैवो, जुग करि देखो खारो10कवि: जोधो रायकसार हंस राजा हो जी, बैठो तखत रचाय11कवि: केशोजी देहडूआवो मिलो जुमलै जुलो, सिंवरो सिरजणहार12कवि: लालचन्द नाईसो दिन लिख दे रे जोयसी, हंसराय करै पयाणों ।13कवि: आसनोजीमेरा लाल नै, ऐसो हरजी रो झूमखो, पांचूं परमल भारी । ए पांचूं जे बस करै, साइ पतिवरता नारी14कवि: अज्ञात कविसाधे मोमणे कियो छै इलोच, जुमलो रचावियो15कवि: अज्ञात कविगुरु भाईयों16कवि: अज्ञात कविगुरु कायमा17कवि: अज्ञात कविरे मन मीठा लोभ पइठा, लिखूं सूं मन्यसा काची18कवि: अज्ञात कविमेरी अंखियां फरूकै जी, काग करूंकै आंगणै19कवि: अज्ञात कविसतगुरु आयो मोमणों महरि करि, सुरनऊ विनऊ साच20कवि: अज्ञात कवितरण तारण जम्भराज आवियो, तेतीसां प्रतिपाल21कवि: अज्ञात कविमैं गुरु पेख्या री माय, सोई सतगुरु त्रिभुवण को राव री22कवि: अज्ञात कविआखिर आखिर लेखो मोमण मांगिये, घर घर फिरै नकीबा23कवि: अज्ञात कविजुग मां जलम लियो मेरा जीयो, वसियो आय बसेरो24कवि: अज्ञात कविजां दिन हंस चलै मेरा जी हो, कुड़ी अंधियारो होई25कवि: ऊदोजी नैणओ गुरु आयो झांभराज देव, निज हक साच पिछाणियो26कवि: ऊदोजी नैणगुरु की कथनि जुल्या मेरा बाबा, जहां का हरिया भाग27कवि: ऊदोजी नैणमैं तो म्हारो श्याम सपीहर, सिंवरीयो28कवि: ऊदोजी नैणगुरु पूरो दातार, म्हे छां थारा मंगता29कवि: ऊदोजी नैणबाजै बाजै रे मादलियां सरलै साध नै, स्वामीजी रा सबद सुहावणां30कवि: ऊदोजी नैणकाया तो मोमण रतन सरीखी, पहरे लो मोमण कोई31कवि: ऊदोजी नैणनारायण नांव अनन्तो, अनन्त अवतार ज्यूं ध्याइये32कवि: ऊदोजी नैणजुमलै जुलिकै जाइये, जो दिल जुमलै होय33कवि: ऊदोजी नैणदीने जागो दीने जागो, ओ गुरु परगट आयो34कवि: ऊदोजी नैणहम परदेसियां हो जी, ओ देसड़लो बिडाणो35कवि: ऊदोजी नैणअहरण नांहि हथोड़ा नांहि, पाणि सूं खालक राजा पिण्ड घड़े रे36कवि: ऊदोजी नैणजागो मोमणों नां सोवो, न करो नींद पियार। जैसा सुपना रैण का, ऐसा ओ संसार37कवि: रंगीलोएक मिलंता दोय मिलै, दोय मिलंता तीन38कवि: ऊदोजी नैणपायल घड़दे रे सुघड़ सुनारा, भांजण घड़ण संवारण हारा39कवि: ऊदोजी नैणसींवरो सतगुर सांम्य, आदि विसनै संभु सही40कवि: रायचन्द सुथारकलयुग तीर्थ थापियो, भाग परापति पावियो41कवि: रायचन्द सुथारजांभेश्वर अवतार लियो, सब धर्मा करि निवासा42कवि: रायचन्द सुथारमेरे कानां आवाज हुई, अवतार लियो संसारा43कवि: रायचन्द सुथारश्याम सिधारे चिलत कियो, पंनरासै अरू तिराणियो44कवि: रायचन्द सुथारमन मेरो सोदागर, विणजत नेहड़ा कीजै जी45कवि: रायचन्द सुथारकांय सखी तेरो मेलड़ो वेस्य, कांय सखीरी आमैण दुमैणी46कवि: अज्ञात कविसत्य सुपन्तर दीठड़ा, सखी मेरे मन्य उपज्यौ सतभाव47कवि: अज्ञात कविआग्यम जो अग्यान क्रत जुग रोप करे, सेंसकला सरबंगी48कवि: समसदीन जीअलमेरो मन खरौ उमाहीयड़ौ, साम्य मीलैण दिदारौ49कवि: अज्ञात कविमुंधे मुख दस मास, ओदर मांय रहयौ50कवि: अज्ञात कविलाडे गोरी वर सांवलौ, सीध व्याह संजोया51कवि: दीपकांगणा मेरे बाले श्री रंग, अंति रूसनाइयां52कवि: पदमघरि क्यों न आवौ प्रभु मेरे जादवां, तम विन्य नैन दुराने53कवि: सुरंदीदिल चंगा मन्य चांदिया, चांदिणा ते मोमिण संसार जी54कवि: केशोजीसतगुरु जी साहेब सीरजण हार, थल्य सीर आयो जी दुख मेटण दातार55कवि: अज्ञात कविजुल्य चालो मेरो भाइड़ा, इण्य पंथड़ल पीयार56कवि: नानिग दासजीवला जी धन्य महुरत्य धैन्य सु बेला, गुरु झांभेसर आयौ57कवि: कूलचंद राय अग्रवालजागो जागो जंबूदीप हुई छै आवाज, सही सौदागर जांभराज आवियो58कवि: कूलचंद राय अग्रवालसांभलि-सांभलि हे म्हारी पदमण माय, सम्भराथल रली बधावणां59कवि: रेड्रोजीजीवला रे जम्भ अचंभो आयो, अपरंपर हेत कियै हरि ध्यावो60कवि: वाजिद जीसदा न संग सहेलियां, सदा न राजा देश वै । सदा न जग मां जीवणां, सदा न काला केश वै । सदा न क…61कवि: लखमण जी गोदाराएकलवाई आप श्री, जांभेश्वर जीवां धणी62कवि: आलम जीआवो मिलो साधो मोमणो, रलि करि जमूं रचाय63कवि: आलम जीकलि मां कलम फिरी, अब छोड़ो मेरा आलमै सिंवरियो64कवि: आलम जीपतवो लिख दो जी हो बांभणां, कह ऊधो समझाय65कवि: आलम जीअब चलिये जारे म्हारा पंथियां, पंथड़ै मत लाय बार66कवि: मधुकरअब चलो रे लालजी, मधकर नहि छै रहण को जोग67कवि: रैदास (रविदास) धतरवालपहलै पहरै रैणि का विणजारियां, तै जलम लियो संसार वै68कवि: भींवराजरे विणजारा न करि पसारा, तांडै हुई तियारी69कवि: भींवराजरे मन रांति तेरी पांति, ओगण आयो भाई70कवि: गुणदास जीजीहो मिलोहो जमाती अरू गुरुभाई, जां मिलियां दिल्ह खुल है71कवि: लाखारामजोड़ो कालंग साथि, विसनु रचावे लो72कवि: वील्होजीगुरुतार बाबा तूं पालक सर्वदुख भंजण, मैं अपराधी तेरा73कवि: वील्होजीभणों गुणों गुणवंतो देव, ज्यांरा गुणां न लाभै छेव74कवि: वील्होजीबाबो सांभल जैसे बागड़ देश, पोहमी पितांबर आवियो75कवि: वील्होजीपहले मेले की मांड हुई, सोला सौ अड़ताले76कवि: वील्होजीकरमणी चलणों इण संसार, संभल कर कर चालिये ।77कवि: वील्होजीविज्ञानी आतम थके, आलोच्यो मन मांय । जां जां जुग में जीवणों, ते दिन दुख में जाय78कवि: वील्होजीदोय तरवर इह बाग मां, एक खारो इक मीठो । नुगरां नजर न आव ही, सुगरां सन्मुख दीठो79कवि: वील्होजीजन्म हारिबे दीन विगूता80कवि: वील्होजीबाबो जंबूदीपे प्रगट्यो, चोचक हुवो उजास । आप दीठो केवल कथै, जिहिं गुरू की हम आस81कवि: वील्होजीऐसी सींचो बाड़ी, सूख न जाई82कवि: केशोदास जी गोदाराजीव के काजे जुमलै जाइये, कीजे गुरू फुरमाइये83कवि: केशोदास जी गोदारारे मन मेरा न कर मुकेरा, काया ढुलैली काची84कवि: केशोदास जी गोदाराओ निज तीरथ तालवो, जोति सही नित श्याम की85कवि: केशोदास जी गोदाराबाबै आप लियो अवतार, श्याम सम्भराथल आवियो86कवि: केशोदास जी गोदारासाधो सिंवरो सिरजण हार, पार ब्रह्म पहली निऊं87कवि: केशोदास जी गोदारासंतो सिंवरो सिरजण हार, जम्भेश्वर जीवां धणी88कवि: केशोदास जी गोदाराजीवड़ा जप जगदीश, जांभेश्वर जीवां धणी89कवि: केशोदास जी गोदारासिले पछिम रे देश, हिंवर तुरी पलाण सी90कवि: केशोदास जी गोदाराकलियुग किसन पधारे, संता करण संभाल जन बाड़े सो बिछड़्या, तहां करण प्रति पाल91कवि: केशोदास जी गोदारासिंवरो सिरजण हार, कलिजुग कायम राजा आवियो92कवि: केशोदास जी गोदाराजां दिन संत मिलै मेरा जीहो, बाजै सुरग बधाई93कवि: केशोदास जी गोदाराजुग जागो जम्भेश्वर राजा, कलजुग कायम आइयो94कवि: केशोदास जी गोदाराबूचो बारां करोड़ में, कियो वैकुण्ठा वास95कवि: केशोदास जी गोदारामेलो कर मोटा धणी, गिणी तेतीसूं ज्ञान96कवि: केशोदास जी गोदाराहटवाड़े हलचल हुवो, असुरे दीन्ही आण97कवि: सुरजनदास जी पूनियांरे गुरु भाई मानों विसन सगाई, जीव स्वार्थ सोई98कवि: सुरजनदास जी पूनियांबाबो मिलियो त्रिभुवण तार, जोति विराजे निज थले99कवि: सुरजनदास जी पूनियांपंनरासै अवतार लियो, गुरु आठम सोम अठोतरै100कवि: सुरजनदास जी पूनियांसतगुरु वाचा क्यूं सरै, क्यूं धरा हुई उमेद101कवि: सुरजनदास जी पूनियांओदर वास लियो मेरा जीयो, तां दिन बार करारी102कवि: सुरजनदास जी पूनियांविसन-विसन बखाण, बलि बलि सारंग प्राणी103कवि: सुरजनदास जी पूनियांदेश पिछम कै गरज करै, घण ओल्हर आयो104कवि: सुरजनदास जी पूनियांझड़कर बूठो भाव करै, भगतां के तांई । भाग परापति भेंट हुई, थल बैठो सांई105कवि: सुरजनदास जी पूनियांअंतर जामी आतमा, गरभ वास पुजाये106कवि: माखनजीजिभिया जपले जंभ सवेरा, आज सम्भराथल आनन्द अपारा107कवि: रामूजी खोड़जां थलियां देव जी भंवरो अवतरियो, जां थलिया छै गाढ़े नूर । भक्तां रे मन चान्दणों, दिलमां …108कवि: गोकुलजीतेतीसां प्रतिपाल, धरणी धर असी धरो ।109कवि: गोकुलजीपण पालण पीसणां गंजण, रूंखां राखण हार । जोधाण जालम तप्यो, अजमल जी अवतार110कवि: हीरानन्द जीसरस हिंडोलणो सम्भराथल, झूलै हो साध111कवि: हरजी वणियाललोहट तणी जे लाज, पत राखो पूरा धणी112कवि: हरजी वणियालसही विसवा वीस, सांचो गुरू समराथले113कवि: हरजी वणियालमहिपत मछ अवतार, संखासुर संतापियो114कवि: हरजी वणियालराजा बलि के द्वार, जांचण आयो नरहरि115कवि: हरजी वणियालमन को बूरो स्वभाव, इनके मते न चालिये116कवि: हरजी वणियालमन सो बुरो न कोय, शिव शंकर संतापिया117कवि: हरजी वणियालरे मन मूरख नहचा तूं रख, भगवत तणां भरोसा118कवि: हरजी वणियालफिटि रे नर फिटि फीटो फिरै, थूल सूं जाय करि प्रीति जोड़ै119कवि: हरजी वणियालदेव तणी परमोध में, कसर्वै समो न कोय120कवि: अज्ञात कविउतर दिसा दोय मोमीण आया, घर पुछावै रूड़े साध को121कवि: अज्ञात कविम्हार गुर क पंथ न्यै जुवल्या मेरा बाबा, जांका हरीया भाग122कवि: दामोजीविसनो विसन भंणति, जग तारण जीवां धणी123कवि: अज्ञात कविओ जपीयो जी भाई मोमीणौ, हम घर वीरण आए124कवि: अज्ञात कविकल्यजिग देवजी को चिलत वखाण्य, पनरासरि तिराणवै125कवि: परमानन्द जी वणियालमीनखा जलम मीले मेरा जीवौ, चूकै भव चौवरासी126कवि: परमानन्द जी वणियालआवो जमे साधो सेवगो, संभलो ग्यान सुजाण जी127कवि: परमानन्द जी वणियालबाबो आपै उपन्ना आप, मछ संखासुर मारियो128कवि: परमानन्द जी वणियालबाबो आवियो आदि विसनु, सम्भराथल साचो धणी129कवि: ऊदोजी अडिंगगिरधर गोकुल आव, गोपी संदेशो मोकल्यो130कवि: ऊदोजी अडिंगसौ दिन हरि की भक्ति करे, एक दिन ध्यावै आण131कवि: ऊदोजी अडिंगमिनखा देही है अणमोली, भजन विना विरथा क्यूं खोवै132कवि: ऊदोजी अडिंगसहंस्र नाम संभाल, परभाते पूजा करो133कवि: ऊदोजी अडिंगआवो मिलो साधो मोमणों, रलि मिली जुमलै होय134कवि: ऊदोजी अडिंगजग में तो दातार बड़ो रे, विधि सूं सुणों विचार135कवि: ऊदोजी अडिंगसतगुरु कृपा करी मेरा जीवो, केवल ज्ञान बतायो136कवि: ऊदोजी अडिंगनिस दिन श्वांस घटे मेरा जीवो, छः सौ इकीस हजारा137कवि: ऊदोजी अडिंगसेवगां सतगुरु बूझियो, तीर्थ कता कहावै138कवि: गोविन्दरामजीश्री जम्भेश्वर धाम, जाय जन धका जो खावै139कवि: गोविन्दरामजीकपिल सरोवर नाम, कलियुग तीरथ थापियो140कवि: गोविन्दरामजीअवगत अलख अपार, पार पावै नहीं कोई141कवि: गोविन्दरामजीमेधा नाम वैकुण्ठ, अखण्ड जोत जहां राजिये142कवि: साहबराम जीपरम भगत पहलाद, हिरणाकुश दुख ही दियो143कवि: साहबराम जीनरसिंह नर मुलतान, सतयुग में साको कियो144कवि: कुम्भाराम जी पूनियांआतम गंग न्हावो भाई, जांसूं सर्व पाप कट जाई145कवि: कुम्भाराम जी पूनियांसुण मन भाई कहूं समझाई, कोप न कीजै भाई146कवि: कुम्भाराम जी पूनियांसाधो भाई ऐसा देश हमारा, जहां नहीं काल का चारा147कवि: साधु जगदीशराम जीआवो मिलो साधो मोमणों, देखो जुमले री लोय जे148कवि: साधु जगदीशराम जीसतगुरु दरसण म्हे जास्यां, निज पुरबली प्रीत पिछाणी ए माय149कवि: साधु जगदीशराम जीआछो लागै जी महाराज, दरसण जाम्भोजी को150कवि: साधु जगदीशराम जीभगवत आय भली बुध देवे, लेना है सो लेइयो151कवि: हरियो (योगी हरिराम जी)मेल्ह बाजोट खवास बुलाया, गरम गंगोदक मंगवाया152कवि: विविध छन्दविसन जमै के देत ही, पाप विलय हो जाय153कवि: रामकरण जी पूनियांजाम्भोजी संभराथले, बेठा आसन धार154कवि: रामकरण जी पूनियांसतयुग धर्म विशेष, चार पेर बतलाया155कवि: रामकरण जी पूनियांलख चौरासी जूण, सब भगवंत की रचना156कवि: रामकरण जी पूनियांपहलो जम्मलो संभराथल पर, जाम्भोजी आप रचायो जीवनै