कवि परिचय — गुणदास जी
गुणदास जी का जन्म 1560-1640 के मध्य अनुमानित है। इनके द्वारा रचित यह साखी मिली है यहां साखी में मिलजुल कर जीवन यापन करने का संदेश दिया है तथा जाम्भोजी की महिमा का वर्णन किया है।
जीहो मिलोहो जमाती अरू गुरुभाई, जां मिलियां दिल्ह खुल है ।१।
जमाती गुरु भाई सभी एक साथ मिलकर चलो आपस में मिलने से दिल खुल जाता है। एक-दूसरे के सुख-दुख में सम्मिलित होकर सहयोग की भावना उत्पन्न होती है ।१।
खुल्है स खुल्है म्हारो सतगुरु बोले, दिल ताला दिल खुल्है ।२।
हमारे सतगुरु ने भी यही बताया है। बार-बार ऐसा ही आदेश दिया है कि हमारे दिलों में अहं और ममता का ताला लगा हुआ है जो दुराव पैदा करता है, वह ताला मिलने से खुल जाता है ।२।
टांके तोले देवजी रतिये मासो, तुल चड़ी आप कसावै ।३।
सतगुरु ने जो बातें बतलाई है वे बहुत ही सटीक तथा यथार्थ है, मानों टांके-तुला पर रति मासे की तरह तोलकर कही गई है इनमें कुछ भी स्थूल नहीं है "म्हे भूल न भाख्या थूलूं" ।३।
बड़ सौदागर जांभराज लालड़ियो, हीरा लाल विसा है ।४।
जाम्भोजी स्वयं बड़े व्यापारी है, जो हीरे लाल माणिक्य का व्यापार करने वाले लाल है। जिन्होनें हीरे लाल बेचने के लिये फैला रखे है। अर्थात् उच्चकोटि का ही नियम धर्म बतलाते है ।४।
दसबंध खरचो गुरु का कवल संभालो, जो साहिब के मन भावै ।५।
यदि गुरु के प्रिय होना है तो अपने वचनों को निभाते हुए अपनी कमाई का दसवां भाग धर्म पुण्य में खर्च करें ।५।
हूरक सूर मिलै मन मानी, उत पायल कोड़ रचावै ।६।
इस प्रकार गुरु के वचनों पर चलोगे तो आगे देवता लोग अति प्यार से सामनें स्वागत करने के लिये आयेंगे और आदर सहित अपने लोक में ले जायेंगे वहां पर सभी नृत्यगान करते हुए आनन्द मनायेंगे ।६।
सुर तेतीसां जांभराय मैले, नूरे नूर मिलावो ।७।
तेतीस करोड़ देवताओं से जाम्भोजी मिलान करवा देंगे। नूर से नूर मिल जायेगा ।७।
हबद सरोवर को म्हारो इधक उमाहो, नित हबद सरोवर न्हावो ।८।
यदि होद सरोवर में स्नान करने की उमंग है तो वहां हमारी इच्छा पूर्ण होगी नित्य प्रति अमृत की प्राप्ति हो सकेगी ।८।
रतन काया मिले नवरंगी, बोहड़ी न इण खंडि आवो ।९।
नवरंगी रत्नकाया की प्राप्ति होगी उसे लेकर स्वर्ग के सुखों को भोगोगे। पुनः इस दुखमय संसार में नहीं आयेंगे ।९।
गढ़ तेतीसां म्हारो वास करावो, पाटो अमर लिखावो ।१०।
हे गुरुदेव ! तेतीस करोड़ देवता जहां बसते है, वहां पर हमें भी पहुंचाओ तथा वहां पर रहने के लिये अमर पट्टा लिखवादो ताकि फिर कभी वहां से वापिस न आना पड़े ।१०।
संभरथलि सतगुरु परगास्यो, कथि केवल ज्ञान सुणायो ।११।
सम्भराथल पर सतगुरु आकर प्रगट हुए है। स्वयं ही कैवल्य ज्ञान कथन करके सुना रहे है ।११।
हम गुनही गुरु म्हारो दाता, म्हारा गुन्हां माफ करावो ।१२।
हम तो अवगुणों से भरे हुए है परन्तु हमारे सतगुरु तो दाता है इसलिये हमारे अवगुणों को अवश्य ही माफ करेंगे ।१२।
गति परमोधे गुणदास बोले, आवागुवणी चुकावो ।१३।
गुणदास जी कहते है कि युग परिवर्तन करने वाले हे देव ! हमारा जन्म मरण का चक्कर काट दीजिये यही आपसे प्रार्थना है ।१३।