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गुरु जम्भेश्वर भगवान
गुरु जम्भेश्वर परिचय

श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान

श्री गुरु जंभेश्वर भगवान विश्नोई पंथ के संस्थापक थे । गुरु जम्भेश्वर भगवान को हम जाम्भोजी नाम से भी जानते हैं । उनका जन्म सन 1451 की कृष्ण जन्माष्टमी को हुआ था । उनका जन्म राजस्थान के पीपासर नामक गांव में हुआ था । उनकी माता का नाम श्रीमती हंसा देवी तथा पिता का नाम श्री लोहट पंवार था । गुरु जंभेश्वर विष्णु भगवान के अवतार थे । 7 वर्ष की आयु तक वे मौन रहे । 27 वर्ष की आयु तक उन्होंने गौ माता की सेवा की । 34 वर्ष की आयु में सन 1485 की कार्तिक बदि अष्टमी के दिन उन्होंने विश्नोई पंथ की स्थापना की । 12 करोड़ जीवों का उद्धार करके कंकेड़ी वृक्ष के नीचे सन 1536 की मार्गशीर्ष कृष्णा नवमी के दिन गुरु जम्भेश्वर भगवान ने स्वेच्छा से निर्वाण पद को प्राप्त किया। विश्नोई वे लोग होते हैं जो गुरु जंभेश्वर भगवान द्वारा दिए गए 29 नियमों का पालन करते हैं ।

इस संग्रह में120 शब्द156 साखियाँ94 कथाएँ16 भजन

नियम 1

तीस दिन का सूतक रखना।

बच्चे के जन्म के बाद माँ द्वारा 30 दिनों तक घर का कोई काम न करना।

नियम 2

पांच ऋतुवंती न्यारो।

मासिक धर्म के पाँच दिनों तक महिला द्वारा घर का कोई काम न करना।

नियम 3

सेरा करो स्नान।

प्रतिदिन सवेरे स्नान करना।

नियम 4

शील का पालन करना।

संयम रखना, चरित्र की पवित्रता बनाए रखना तथा पति को पत्नीव्रत और पत्नी को पतिव्रता धर्म का पालन करना।

नियम 5

संतोष रखना।

नियम 6

शुचि रखना।

बाह्य और आन्तरिक पवित्रता रखना।

पीपासर

पीपासर

नागौर तहसील, नागौर जिला, राजस्थान

यहां सन 1451 की कृष्ण जन्माष्टमी के दिन गुरु जम्भेश्वर भगवान का जन्म हुआ था।

समरथाल धोरा

समरथाल धोरा

नोखा तहसील, बीकानेर जिला, राजस्थान

यहां पर सन 1485 की कार्तिक बदि अष्टमी के दिन गुरु जम्भेश्वर भगवान ने बिश्नोई धर्म की स्थापना की।

मुकाम

मुकाम

नोखा तहसील, बीकानेर जिला, राजस्थान

यहां गुरु जम्भेश्वर भगवान की समाधि स्थित है।

लालासर साथरी

लालासर साथरी

नोखा तहसील, बीकानेर जिला, राजस्थान

यहां पर खेजड़ी वृक्ष के नीचे सन 1536 की मार्गशीर्ष कृष्णा नवमी के दिन गुरु जम्भेश्वर भगवान ने निर्वाण पद को प्राप्त किया।

जांगलू

जांगलू

नोखा तहसील, बीकानेर जिला, राजस्थान

यहां पर गुरु जम्भेश्वर भगवान के चोळा, चिम्पी तथा भिक्षा पात्र रखे हुए हैं।

जाम्भोळाव तालाब

जाम्भोळाव तालाब

बाप तहसील, फलौदी जिला, राजस्थान

यहां पर गुरु जम्भेश्वर भगवान ने तीर्थ स्थल का निर्माण करवाया जो पहले लुप्त हो चुका था।

रोटू

रोटू

जायल तहसील, नागौर जिला, राजस्थान

यहां पर सन 1515 में गुरु जम्भेश्वर भगवान ने ऊमा का भात भरा था तथा राव दूदा का खांडा (तलवार), जो गुरु जम्भेश्वर भगवान ने उन्हें प्रदान किया था, आज भी यहां सुरक्षित रखा हुआ है।

लोदीपुर

लोदीपुर

मुरादाबाद जिला, उत्तर प्रदेश

भगतों के आग्रह पर गुरु जम्भेश्वर भगवान यहाँ पधारे थे तथा इस क्षेत्र में खेजड़ी का वृक्ष लगाया था।

सबदवाणी

गुरु जम्भेश्वर भगवान के मुख से उच्चरित 120 पावन शब्द।

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1शब्द

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2शब्द

मोरे छाया न माया लोही न मासूं, रक्तूं न धातूं मोरे माय न बापूं। आपण आपूं रोही न रापूं, कोपूं न कलापूं, दुख न सरापूं। लोई अलोई त्यूंह तृलोई ऐसा न कोई जंपा भी सोई, जिहिं जंपे आवागवण न होई। मोरी आद न जाणत, महीयल धूंवा बखाणत, उरध ढ़ाकले तृसूलूं। आद अनाद तो हम रचिलो, हमें सिरजीलो से कौण। म्हे जोगी के भोगी कै अल्प अहारी, ज्ञानी कै ध्यानी कै निज कर्मधारी। सोखी के पोखी, कै जल बिंबधारी, दया धर्म थापले निज बाला ब्रह्मचारी ॥2॥

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3शब्द

मोरे अंग न अलसी तेल न मलियो, ना परमल पिसायो। जीमत पीवत भोगत विलसत दीसां नाही, म्हापण को आधारूं। अड़सठ तीर्थ हिरदै भीतर, बाहर लोका चारूं। नान्ही मोटी जीया जूणी, एति सांस फूरंतै सारूं। वासंदर क्यूं एक भणिजै, जिहिं के पवन पिराणों। आला सूका मेल्है नाही, जिहिं दिश करै मुहाणौं। पापे गुन्है वीहे नाही, रीस करै रीसाणौं। बहूली दौरे लावण हारू, भावै जाण मैं जाणूं। न तूँ सुरनर न तूँ शंकर, न तूँ राव न राणों। काचै पिण्ड अकाज चलावै, महा अधूरत दाणों। मौरे छुरी न धारूं लोह न सारूं, न हथियारूं। सूरज को रिप बिहंडा नाही, तातै कहा उठावत भारूं। जिहिं हाकणड़ी बलद जू हाकै, न लोहै की आरूं ॥3॥

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