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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 1 / 120

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हांसा लोहट ने कहे, सुनों बात चित लाय।

बालक मोटो बोलै नहीं, कोई जतन कराय।1।

शब्द 1

ओ३म् गुरु चीन्हों गुरु चीन्ह् पुरोहित, गुरु मुख धर्म बखाणी।

जो गुरु होयबा सहजे शीले शब्दे नादे वेदे, तिहिं गुरु का आलिंकार पिछाणी।

छव दरसण जिहिं के रूपण थापण, संसार बरतण निज कर थरप्या सो गुरु प्रत्यक्ष जांणी।

जिहिं के खरतर गोठ निरोतर वाचा, रहिया रूद्र समाणी।

गुरु आप संतोषी अवरां पोखी, तंत महारस बांणी।

के के अलिया बासण होत हुतासण, तामैं खीर दूहीजूं।

रसूवन गोरस घीय न लीयूं, न तहां दूध न पाणी।

गुरु ध्याईरे ज्ञानी तोड़त मोहा, अति खुरसाणी छीजत लोहा।

पांणी छल तेरी खाल पखाला, सतगुरु तोड़े मन का साला।

सतगुरु है तो सहज पिछाणी, कृष्ण चरित विन काचै करवै रह्यो न रहसी पांणी।।