संध्या सुमरण आरती — भजन भरोसे दास
संध्या सुमरण आरती, भजन भरोसे दास । मनसा वाचा कर्मणां, सतगुरु चरण निवास ।
पींपासर सूं परगटे, द्वादस कारण देव । ब्रह्मादिक पावै नहीं, अद्भुत जांको भेव ।
सीस धरणी धर करत हूं, नमस्कार सौ बार । इष्टदेव बाबो जम्भगुरु, लीला हित अवतार ।