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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह०२ / 15

संध्या सुमरण आरतीभजन भरोसे दास

संध्या सुमरण आरती, भजन भरोसे दास । मनसा वाचा कर्मणां, सतगुरु चरण निवास ।

पींपासर सूं परगटे, द्वादस कारण देव । ब्रह्मादिक पावै नहीं, अद्भुत जांको भेव ।

सीस धरणी धर करत हूं, नमस्कार सौ बार । इष्टदेव बाबो जम्भगुरु, लीला हित अवतार ।