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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह०१ / 15

धुनआये म्हारे जम्भगुरु जगदीश

प्रात:- आये म्हारे जम्भगुरु जगदीश, सुर नर मुनि हरि नै नांवै सीस । सांयकाल:- गुरू आप समराथल आये हो, म्हारे सन्तों के मन भाये हो।।

लोहट घर अवतारा हो, ऐतो धिन धिन भाग हमारा हो ।१। अलख निरंजन आये हो, म्हारे सन्तों के मन भाये हो ।२। घट - घट मांय बिराजे हो, ऐतो सरस सबद धुनि गाजे हो ।३। जांके चरण कोई ध्यावे हो, ऐतो चार पदार्थ पावे हो ।४। समराथल आसण साजे हो, ऐतो झिगमिग जोत विराजे हो ।५। नंद घरे गऊवां चारी हो, ऐतो नख पर गिरवर धारि हो ।६। पूरण ब्रह्म अखण्डा हो, जांके रोम कोट ब्रह्मण्डा हो ।७। इस धुन को कोई गावे हो, ऐतो चार पदार्थ पावे हो ।८। जंभ गुरू की आशा हो, ऐतो यश गावै गंगादासा हो ।