भजन 2
चालो म्हारी सहियां ए जाम्भेजी रा मेला में
चालो म्हारी सहियां ए जाम्भेजी रा मेला में । टेर।
सोने रूपे री सहिया ईंट पड़ास्यां, मंदिर चिणास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 1।
कूं कूं केसर री सहियां गार गिलोस्यां, मंदिर निपास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 2।
गंगा जमना रो सहिया नीर मंगास्यां, गुरु ने न्हवास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 3।
गोरी गाय रो सहियां दूध मंगास्यां, गुरु ने पिलास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 4।
हिंगलू पागा रो सहियां ढ़ोलियो ढलास्यां, गुरु ने पोढ़ास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 5।
घिरत गायां रो सहियां छाणकर लास्यां, जोत करास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 6।
मोठ बाजरी री सहियां चूण लेजास्यां, दरसण करस्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 7।
चार खूंटा रा सहियां आवे जातरी, धोक लगास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 8।
साखी गायसां, सबद बोलस्यां, मुरली गायस्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 9।
अन्न धन रो भण्डार भरे, गुरु कूख भरेला ए, जाम्भेजी रा मेला में । 10।
सात सहेल्यां रलमिल जास्यां, हरजस गायस्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 11।