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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह2 / 16

भजन 2

चालो म्हारी सहियां ए जाम्भेजी रा मेला में

चालो म्हारी सहियां ए जाम्भेजी रा मेला में । टेर।

सोने रूपे री सहिया ईंट पड़ास्यां, मंदिर चिणास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 1।

कूं कूं केसर री सहियां गार गिलोस्यां, मंदिर निपास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 2।

गंगा जमना रो सहिया नीर मंगास्यां, गुरु ने न्हवास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 3।

गोरी गाय रो सहियां दूध मंगास्यां, गुरु ने पिलास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 4।

हिंगलू पागा रो सहियां ढ़ोलियो ढलास्यां, गुरु ने पोढ़ास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 5।

घिरत गायां रो सहियां छाणकर लास्यां, जोत करास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 6।

मोठ बाजरी री सहियां चूण लेजास्यां, दरसण करस्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 7।

चार खूंटा रा सहियां आवे जातरी, धोक लगास्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 8।

साखी गायसां, सबद बोलस्यां, मुरली गायस्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 9।

अन्न धन रो भण्डार भरे, गुरु कूख भरेला ए, जाम्भेजी रा मेला में । 10।

सात सहेल्यां रलमिल जास्यां, हरजस गायस्यां ए, जाम्भेजी रा मेला में । 11।