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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह3 / 16

भजन 3

म्हाने आछा लागे महाराज दरसण जाम्भेजी रा

म्हाने आछा लागे महाराज दरसण जाम्भेजी रा ।

म्हाने प्यारा लगे गुरुदेव दरसण जाम्भेजी रा। टेर।

जो जन धुन शब्दां री सुणिये, घट परमल की बास दरसण जाम्भेजी रा । 1।

चहूं दिस सन्मुख पीठ नहीं दरसे, क्रोड़ भाण प्रकाश दरसण जाम्भेजी रा । 2।

चालत खोज खेह नहीं खटको, नहीं दिसे तन छांय दरसण जाम्भेजी रा । 3।

भगवी टोपी भगवो चोलो, भलो सुरंगो भेष दरसण जाम्भेजी रा । 4।

समराथल पर आसण लगायो, दिया शबदां रा उपदेश दरसण जाम्भेजी रा । 5।