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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह1 / 16

भजन 1

आव आव म्हारा जम्भ गुरु स्वामी

आव आव म्हारा जम्भ गुरु स्वामी, आयां सरसी रे, मरूधर देश में । टेर।

साल बंयारले काति बदी गुरु आप दिया उपदेश जी, अंधियारो म्हारो दूर हो गयो उग्यो भाण जी । मरूधर देश में ।1।

पाहल मंत्र पिया प्रेम सूं, जिण सूं कटिया पाप जी बारह कोटि जीवां रे कारण आया आप जी । मरूधर देश में । 2।

वर्ष इक्यावन सारी जगत में, मानव धर्म चलाया जी उपदेश दियो उणतीस धर्म गुरु सबको सिखाया जी। मरूधर देश में ।3।

छोटी मोटी सब न्याति को अमृत प्यालो पायो जी समराथल भूमि पर गुरुजी पन्थ चलायो जी । मरूधर देश में । 4।

विष्णु धर्म की करी स्थापना वो दिन याद आवे जी आज थारे बिन जीव कलयुग में घणो दु:ख पावे जी । मरूधर देश में । 5।

जाली कांगरा निज मंदिर रा थारे हाथ सूं बणाया जी मुकटि छाजा छतरी राख, गुरु मंदिर चिणायो जी । मरूधर देश में । 6।

थारी समाधि रो दर्शण कर जीव म्हारो बिलमावां जी सुरजाराम सूं भजन सीख म्हें हरदम गावा जी । मरूधर देश में । 7।