कवि परिचय — लाखाराम
लाखाराम जन्म संवत् 1560-1650 अनुमान से ज्ञात हुआ है। ये मारवाड़ के हजूरी संत बिश्नोई थे। इनकी एक साखी प्राप्त हुई है जो आगम साखी के नाम से प्रचलित है। ऐसी प्रसिद्धि है कि आगे कल्कि अवतार होगा इस सम्बन्ध में कवि ने कल्पना की है कि वह होने वाला अवतार कैसा होगा, इसलिये इस साखी का महत्व है।
जोड़ो कालंग साथि, विसनु रचावे लो । उतपति धंधूकार, पुंवण चलावे लो ।१।
कलयुग में विष्णु फिर से युगानुसार आयेंगे यहां आकर युग को साथ लेकर नयी रचना करेंगे। एक बार पुनः प्रलय होगा उसमें धन्धूकार की स्थिति हो जायेगी तथा चारों तरफ तुफानी हवाऐं चलेगी ।१।
दिल्ली अरू मुलतान, तखत रचावे लो । धरण तांबे की होय, ठणक बजावे लो ।२।
दिल्ली तथा मुलतान में स्वयं कल्कि अवतार धारण करके विष्णु अपना आसन लगायेंगे यह धरती सूर्य की गर्मी से ताम्र वर्ण की लाल हो जायेगी। उस समय वहां पर कल्कि आयेंगे और पके हुए बर्तन की भांति बजाकर देखेंगे अर्थात् यहां के लोगों की परीक्षा करेंगे ।२।
सहंसै किरणै सूर, फेर तपावे लो । शरणै रहसी साध, असुरां दझावे लो ।३।
हजारों किरणों से सूर्य को तपने का आदेश देंगे जिससे यह सम्पूर्ण संसार ही झुलस जायेगा जो साधु सज्जन होंगे परमात्मा की शरण ग्रहण करेंगे उनकी तो रक्षा हो सकेगी परन्तु जो दुष्ट प्रकृति के लोग वे कंपायमान होंगे ।३।
मेघां डंबर छात, छांह करावे लो । दुल-दुल होय असवार, तमक नचावे लो ।४।
सूर्य तपने के बाद चारों ओर से बादल आकर सूर्य को ढक लेंगे तथा भयंकर वर्षा करेंगे जिससे जल ही जल हो जायेगा उसी समय ही घोड़े पर सवार होकर घोड़े को नचाते हुए कल्कि आयेंगे ।४।
खड़ग तिधारो हाथ, विष्णु संभावे लो । दल पंचाधा जोड़, निकलंक आवै लो ।५।
तीन धार वाला खड़ग हाथ में लेकर स्वयं विष्णु ही आयेंगे और सभी की खोज खबर लेंगे। श्रेष्ठ तथा बलवान पुरूषों का दल बनाकर निकलंक के रूप में विष्णु आयेंगे ।५।
जादव छपन करोड़, हलधर आवै लो । क्रोड़ लिया संग पांच, पहलाद पधारे लो ।६।
तथा उनके साथ छप्पन करोड़ यादव आयेंगे तथा साथ में बलराम भी आयेंगे पांच करोड़ को साथ लेकर प्रहलाद भी आयेंगे ।६।
साते हरिचन्द राव, रोहितास आवै लो । पांचूं पाण्डूं साथ, अहंमन आवै लो ।७।
सात करोड़ साथ में लेकर हरिश्चन्द्र तथा रोहताश्व भी आयेंगे। पांचों पाण्डव तथा अभिमन्यु भी साथ में आयेंगे ।७।
होय वृषभ असवार, महादेव आवै लो । परम हंस चड़ि पेख्य, ब्रिहमा आवे लो ।८।
वृषभ पर सवारी करके महादेव शंकरजी भी आयेंगे ।८।
होय गरूड़ असवार, विसन पधारे लो । सहस अठियासी सिद्ध, नेमनाथ आवे लो ।९।
गरूड़ पर सवारी करके विष्णु भी आयेंगे तथा हंस पर सवारी करके प्रजापिता ब्रह्माजी का भी आगमन होगा। अठ्यासी हजार सिद्ध तथा नेमिनाथ आदि भी आयेंगे ।९।
पदम अठारह साथ, अंगद आवै लो । चोह जुग का सिद्ध साध, गोरख आवै लो ।१०।
राम की सेना के अठारह पदम बंदर तथा अंगद भी आयेंगे। चार युगों के सिद्ध साधु गोरख का भी आगमन होगा। उनके साथ में चौसठ योगिनियां भी आयेगी ।१०।
चोसठ जोगणी साथ, वीर बुलावे लो । डग डग डेरू वाय, आण भिड़ावै लो ।११।
उस समय जब पाप की अभिवृद्धि हो जायेगी, कलयुग का प्रभाव बढ जायेगा तो स्वयं कल्कि ही डमरू बजाकर युद्ध करवायेंगे, एक-दूसरे को आपस में भिड़वा देंगे जब युद्ध में पापी लोग मर जायेंगे तो पुनः धर्म की स्थापना हो सकेगी इस प्रकार से कलयुग के सिर को तोड़कर पुनः सतयुग की स्थापना करेंगे, उस समय धरती डोलने लग जायेगी ।११।
सिर कालंग को तोड़, धरण डुलावै लो । वसुधा कुवारी को ब्याह, परण ण आवे लो ।१२।
मेंहदी साह सलेम, हाथ रचावै लो । एक लख असी हजार, महंमद आवै लो ।१३।
धरती का स्वामी न होने से ही इस पर अनेक लोग अत्याचार करते थे। जब कल्कि अवतार होंगे तो इस कुमारी धरती के साथ विवाह रचायेंगे यह धरती अपने स्वामी को प्राप्त करेगी मानों भगवान स्वयं धरती से विवाह करने के लिये आयेंगे यह धरती सनाथ हो जायेगी। स्वकीय यश, कीर्ति, लालिमा तथा लीला रूपी मेंहदी हाथ में रचायेंगे एक लाख अस्सी हजार को साथ में लेकर महमंद भी इस विवाह में सम्मिलित होंगे ।१३।
अथरवण वेद उच्चार, ब्याह बंधावै लो । अणवर ईश जो इंद, सगति बुलावै लो ।१४।
जब विवाह रचायेंगे तो अथर्वेद का उच्चारण किया जायेगा तथा इन्द्र, शंकर आदि अन्य देवता वहीं सभी मिलकर उपस्थित होंगे और विवाह देखेंगे ।१४।
करोड़ तेतीसूं जोड़, पहलाद वधावै लो । आरती संवीरी हाथ, विसन करावै लो ।१५।
तेतीस करोड़ देवताओं को एकत्रित करके स्वयं प्रहलाद भी बधाई, गान स्वागत सहित आयेंगे प्रहलाद स्वयं दिव्य आरती का थाल लेकर आरती करेंगे ।१५।
अनंत करोड़ि वैसाण, विवाण चलावै लो । भूंयजल खेवणहार, नारिस्यंघ आवै लो ।१६।
अनन्त करोड़ भक्तों को साथ लेकर विवाण में बिठायेंगे और पार उतार देंगे, स्वयं नृसिंह ही पार उतारने के लिये पुनः आयेंगे ।१६।
पोहता पार गिराय, वैकुण्ठ बसावै लो । बोल लाखं पात, आगम गावै लो ।१७।
जो पार पहुंच जायेंगे उन्हें वहीं वैकुण्ठ में ही सदा ही रहने के लिये प्रदान करेंगे साधु लाखाराम कहते है कि मैं आपको भविष्य में होने वाले कल्कि अवतार के बारे में बतला रहा हूं ।१७।