विसनो विसन भंणति, जग तारण जीवां धणी। किसन कायम करतार, हरि हरि जपियो दुनि। हरि सांचौ जपौ दुनिया, संगठ मांहि उबारयसी। संगठ मांहि उबारसी नै, पहलाद वीरिया तुरत्य आयो। मील्यो मया करि मीत, परमेसर पुरो धणी। देव को दीदार दीस, विसन विसन भणंत ।१।
जगत को तारने वाले मालिक विष्णु का स्मरण भजन करें वही विष्णु ही कृष्ण के रूप में कर्ता धर्ता बनकर आये थे उसी हरि का स्मरण बारंबार करें। सच्चे मन से हरि का स्मरण करे वही अनेकों प्रकार के कष्टों से रक्षा करेंगे। निश्चित ही संकटों से रक्षा करेंगे क्योंकि वही एक ही परमेश्वर सभी का मालिक है। प्रहलाद को जब संकट आया था तब वही विष्णु ही नृसिंह का रूप धारण करके तुरन्त आये थे। वही विष्णु ही इस समय जाम्भेश्वर जी के रूप में अपनी माया द्वारा "अनेक रूप रूपाय" धारण करके आये है। देवजी की कृपा बरस रही है अपने घड़े को सीधा करें। अवश्य ही अमृत वर्षा से आपका घड़ा भर जायेगा ।१।
झंभ गुरु जगनाथ, मधु सुदन मन्य भांवणौ। खाल्यक दैत दीवाण्य, सांई को सबद सुहावणौ। सांई को सबद सुहावणौ, सकल को आधार। मोहनी मुरती सकल शोभा, साम्य सिरजैण हार। गोम्यद गीरधर नांव नरहरी, अंतर जामी ईस। रीणछोड़ राघौ क्रीम कैसो, झंभ गुरु जगदीश ।२।
लिछमण राजा राम, परस परम गुर पेखीया। कान्ह कुंवर नंदलाल, सिरजण हारा देखीया। सिरजण हारा देखिया नै, पत्यसाह पुरो कछ कोरंभ तूं धणी। मछ महपत्य मेल्य मेख, बावन बुध रामै धणी। निरंकार निरंजण अलख संभु, चत्रभुज तमै थया। लछण राजा राम, परस परमेसर गुरु पेखिया ।३।
नारायण नीज नाम, जपीय तो सुख पाइया। त्रिकमे तिलक तीयार, गोम्यद का गुण गाइये। गोम्यद का गुण गाइय जी, जो श्री लाल गोपाल। चवदै भुवण रो राजियो, निकलंक दीन दयाल। जगनाथ जी का कोड कीजै, दवारि का सुदामा। मढ़ी पलटी हरि महल कीया, नारायैण नीज नाम। जपीय तो सुख पाइये ।४।
जम्भगुरु जी जगन्नाथ स्वामी है। मधुसुदन भगवान विष्णु सभी के मन को आकर्षित करते है। संसार के स्वामी सभी के सहारा रूप श्री देवजी की वाणी सुहावणी शोभायमान है। श्रवण कीर्तन करने से सभी के मन को हरण करने वाली है। सभी शास्त्रों की आधार वाणी श्रवण करें। सिरजन हार स्वामी की दिव्य मोहनी मूरति शोभायमान हो रही है। परमात्मा को अनेकों नामों से पुकारा जाता है। जैसे गिरधर, गोविन्द, नरहरि, विष्णु, अन्तर्यामि, ईश्वर, रणछोड़, राघव, करीम, केसव, झंभगुरु, जगदीश, लक्ष्मण, राजाराम, परसराम, गुरु आदि कान्ह, कृष्ण, कंवर, नन्दलाल, परमेसर, सतगुरु, सृजनहार, पातसाह, पूर्णरूप, कच्छ, कौरंभ, मच्छ, महीपति, बावन, बुध, निरंकार, निरंजन, अलख, शंभु, चतुर्भुज, नारायण, त्रिकम, तिलक, श्रीलाल गोपाल, चवदै भवन का राजा, श्री भगवान इत्यादि नामों से उस गोविन्द का गुणगान करें। जप-तप करें। वह निष्कलंक दीन दयाल जगन्नाथ से प्रेम करें जिन्होनें द्वारिकानाथ ने सुदामा की झोंपड़ी पलटकर महल बना दिया था। उसी का जप करें तो सुख मिलेगा ।४।
नारसिंघ नर मुलताण्य, मेछ मलण नै आवियो। साधा करण संभाल, रीण मां साध उबारियो। रीण मां साध उबारियो नै, सारीया सह काज। देव दया करि मुकति दीजै, जांह नै तुठो राज। वीसन दांम मुकति दीजै, रथि आयो रहमांण। पोहप मा परगास कीयो, नारयसिंघ नर मुलताण। भगता संग्य बुधर रंम्यौ ।५।
भगवान ने नृसिंह का रूप धारण करके राक्षस हिरण्यकश्यपू को मारने के लिये आये थे। संत प्रहलाद की रक्षा की थी और युद्ध भूमि में जो सेवकों की रक्षा करता है पाण्डवों को बचाता है वही देव हमारी रक्षा करे। हे देव ! दया करे ! दामोजी कहते है कि हमें जीवन युक्ति और मुक्ति प्रदान करें। जिन्होनें फूल में सुगन्धी और सूर्य रूप होकर सभी को प्रकाशित एवं विकसित किया है। उसी देव को मेरा बारंबार नमन है। स्वीकार करें एवं आनन्दित करें। भक्तों के साथ भूधर स्वामी परमात्मा ने खेल किया है। वह हमें भी सफल जीवन जीने की कला प्रदान करें।