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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह123 / 156

साखी-123 (अज्ञात)

ओ जपीयो जी भाई मोमीणौ, हम घर वीरण आए

कवि: अज्ञात कवि

ओ जपीयो जी भाई मोमीणौ, हम घर वीरण आए। हम उन मेलो करि गुरु कायमा, जांणौ अठसठि तीरथ न्हाए। जो पुन अठसठि जी भाई तीरथो, गुर सुभीयागत म्हारो ।१।

हे भाई मोमिणो ! उस परम पिता परमात्मा का स्मरण जप ध्यान करे हम यहां पर इस मृत्युलोक में पराये घर पर आये हुए है क्योंकि "घर आगे इत गोवलवासो, कुड़ी आधो चारी" ।। सबद ।। हम उस प्रत्यक्ष गुरुदेव से संमेलन करें उससे मानों अड़सठ तीर्थों में स्नान हो जायेगा ।१।

देव दियाव जी भाई मोमीणौ, देत न करो उधारौ। जैसा सुपना जी भाई रैण का, असा यौ संसारौ ।२।

जो पुण्य अड़सठ तीर्थों में स्नान करने से होगा वही पुण्य हमारे गुरुदेव के घर पर आने से उनके सदुपदेश श्रवण मनन निदिध्यासन करने से होगा। जो देव तुल्य सज्जन महात्मा है उसे तो सर्वस्व दे देते है तथा जो दैत्य सदृश जन है उनका भी उद्धार कर देते है ।२।

कांय भाइ मोमीणौ औ धन संचौ, संच्य संचि छलो बुखारौ। यो धन खंक जी भाइ होयसी, खाली रहया बुखारौ ।३।

हे भाई मोमिणो ! केवल दिन-रात धन एकत्रित करने में ही क्यों लगे हो अन्य भी कुछ कार्य तुम्हारे लिये निर्धारित किया गया है। धन-धान्य की कोठियां भरने में ही लगे हो। यह धन तुम्हारा अन्तिम समय में साथ नहीं देगा। ये धान की कोठियां खाली हो जायेगी। तुम्हारे कर्मों की कोथली भी भोगने से खाली हो जायेगी। आखिर में खाली हाथ ही यहां से जाना होगा। क्योंकि यह संसार रात्रि के स्वप्न के समान है जो निन्द्रा टूटते ही स्वप्न का संसार समाप्त हो जाता है ।३।

दुल दुल घोड़ो भाई साखंती, होय कायम असवारौ। वसधा कंवरी जी भाई परण्यसी, आप कीसन मुरारो ।४।

यह कलयुग बीतेगा और सतयुग का आगमन होगा तब स्वयं काया राजा विष्णु दिव्य अद्भुत तेजस्वी घोड़े पर सवार होंगे और पापियों का विनाश करेंगे। इस धरती के भार को मिटायेंगे पुनः सतयुग का आगमन होगा। पापों के भार से हल्की हुई पवित्र धरणी से पुनः विवाह रचायेंगे। यानि पुनः नई सृष्टि इस धरती पर बसायेंगे। ऐसा अनेकों बार करते आये है।