कवि परिचय
अज्ञात कवि
20 साखियाँ
इनकी साखियाँ
साखी कणां की-14
साधे मोमणे कियो छै इलोच, जुमलो रचावियो
साखी कणां की-15
गुरु भाईयों
साखी कणां की-16
गुरु कायमा
साखी छंदां की-17
रे मन मीठा लोभ पइठा, लिखूं सूं मन्यसा काची
साखी कणां की-18
मेरी अंखियां फरूकै जी, काग करूंकै आंगणै
साखी छन्दां की-19
सतगुरु आयो मोमणों महरि करि, सुरनऊ विनऊ साच
साखी छंदां की राग आसावरी-20
तरण तारण जम्भराज आवियो, तेतीसां प्रतिपाल
साखी छन्दां की राग आसावरी-21
मैं गुरु पेख्या री माय, सोई सतगुरु त्रिभुवण को राव री
साखी छन्दां की राग गवड़ी-22
आखिर आखिर लेखो मोमण मांगिये, घर घर फिरै नकीबा
साखी राग सोरठ छन्दां की-23
जुग मां जलम लियो मेरा जीयो, वसियो आय बसेरो
साखी राग सोरठ छन्दां की-24
जां दिन हंस चलै मेरा जी हो, कुड़ी अंधियारो होई
साखी-46 (अज्ञात कवि)
सत्य सुपन्तर दीठड़ा, सखी मेरे मन्य उपज्यौ सतभाव
साखी-47 (अज्ञात कवि)
आग्यम जो अग्यान क्रत जुग रोप करे, सेंसकला सरबंगी
साखी-49 (अज्ञात कवि)
मुंधे मुख दस मास, ओदर मांय रहयौ
साखी-50 (अज्ञात कवि)
लाडे गोरी वर सांवलौ, सीध व्याह संजोया
साखी अज्ञात-55
जुल्य चालो मेरो भाइड़ा, इण्य पंथड़ल पीयार
साखी-120 (अज्ञात कवि कृत)
उतर दिसा दोय मोमीण आया, घर पुछावै रूड़े साध को
साखी-121 (अज्ञात)
म्हार गुर क पंथ न्यै जुवल्या मेरा बाबा, जांका हरीया भाग
साखी-123 (अज्ञात)
ओ जपीयो जी भाई मोमीणौ, हम घर वीरण आए
साखी-124 (अज्ञात)
कल्यजिग देवजी को चिलत वखाण्य, पनरासरि तिराणवै