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गुरु जम्भेश्वर भगवान

कवि सूची

साखी भावार्थ प्रकाश के कवियों का परिचय।

01

अज्ञात कवि (प्रारम्भिक हजूरी साखियां)

2 साखियाँ

संस्कृत में साक्षी शब्द को ही बोलचाल की मरूभाषा में साखी कहते है। इनमें कुछ साखियां तो गुरु जाम्भेश्वर जी की विद्यमानता में ही गुरु देव को लक्ष्य करके कही गई है तथा कुछ साखियों की…

02

तेजोजी चारण

1 साखियाँ

तेजोजी चारण श्री गुरु जाम्भेश्वर जी से पाहल लेकर बिश्नोई बने थे। इनको कुष्ट रोग था जाम्भोजी से भेंट वार्तालाप एवं जाम्भोजाव तालाब में स्नान करने से रोग की निवृति हो गई थी। जाम्भाणी…

03

समसदीन जी

3 साखियाँ

विक्रम संवत् 1490-1550 में इन्होनें अपना जीवन यापन गुरु जाम्भोजी की शरण ग्रहण करके किया था। ये नागौर के मुसलमान थे। जाम्भोजी के दिव्य अलौकिक लीला देखकर शिष्य बन गये थे। उन्होनें अप…

04

आंछरे जी

1 साखियाँ

जन्म विक्रम संवत् 1500-1550 के आसपास होना अनुमानित है ये बीकानेर के समीपस्थ किसी गांव के थे। गुरु जाम्भोजी के हजूरी भक्त थे। उनका सिद्ध योगी होना इस साखी से ध्वनित होता है साखी राग…

05

सुरजन जी

1 साखियाँ

इनका समय अनुमानतः विक्रम संवत् 1500-1570 है। जाम्भाणी साहित्य में सुरजन जी के नाम से तीन कवि हुए है ऐसा उल्लेख है परन्तु ये प्रथम तथा हजूरी संत कवि थे। इन्होनें एक साखी राग सुबह मे…

06

शिवदास जी

1 साखियाँ

जन्म संवत् 1500-1570 अनुमानित है। ये जाम्भोजी के शिष्य सदा ही साथ रहने वाले हजूरी कवि थे। इन्होनें एक साखी की रचना की है जो राग सुहब में गेय है।

07

अभियादीन

1 साखियाँ

जन्म संवत् 1500-1570 के मध्य जीवन काल अनुमानित है। ये नागौर के गृहस्थ मुसलमान थे। जाम्भेश्वर जी की वाणी तथा सिद्धि नियम धर्म से प्रभावित होकर शिष्यत्व स्वीकार किया था। इनकी रचना 14…

08

जोधो रायक

1 साखियाँ

इनका जीवन काल 1500-1570 मध्य अनुमानित है। ये हजूरी कवि थे। ये संभवतः रायक जाति से सम्बन्धित रहे होंगे। इन्होनें अपने गुरु भाईयों से जुमलै में आने का आह्वान किया है। जहां गुरुदेव वि…

09

केशोजी देहडू

1 साखियाँ

जीवन काल 1500-1580 अनुमानित है ये हजूरी कवि केशोजी थे। इनकी मात्र एक ही साखी मिलती है। राग सुहब में गेय कणां की साखी है। इसे जुमलै की तीसरी साखी के रूप में मान्यता प्राप्त है।

10

लालचन्द नाई

1 साखियाँ

जन्म विक्रम संवत् 1580 अनुमानतः है ये बीकानेर के किसी गांव के है। लूर में इनका नाम आता है इसलिये हजूरी कवि होना प्रमाणित होता है। इनकी एक साखी छंदा की मिलती है जो राग गवड़ी में गेय…

11

आसनोजी

1 साखियाँ

विक्रम संवत् 1500-1600 के मध्य है ये महलाणा गांव के सोढ़ा जाति के भाट थे। जाम्भेश्वर जी के धर्म नियम से प्रभावित होकर शिष्य बन गये थे। ये गायन विद्या में प्रवीण थे। जाम्भोजी ने यह…

12

ऊदोजी नैण

14 साखियाँ

जन्म विक्रम संवत 1505 तथा स्वर्गवास 1593। जाम्भाणी साहित्य में ऊदोजी नैण की कथा बड़ी रोचक एवं प्रेरणादायक है। पंथ में सम्मिलित होने से पूर्व गोठमांगलोद में महमाई मन्दिर के पुजारी थ…

13

रायचन्द सुथार

6 साखियाँ

कवि रायचन्द सुथार - 23, जन्म 1525-1610 इनके बारे में जम्भसार में परिचय मिलता है। ये हजूरी कवि थे। जाम्भोजी के साथ में रहते थे। भजन गायन करते थे। इनके द्वारा रचित छः साखियां प्राप्त…

14

कूलचंद राय अग्रवाल

2 साखियाँ

कूलचंद राय अग्रवाल सं. 1505-1593 जन्म एवं अन्त अनुमानित है। ये उतर प्रदेश के अग्रवाल बिश्नोई थे। प्रत्येक वर्ष दो बार सम्भराथल पर देव दर्शनार्थ आया करते थे। शब्दवाणी प्रसंगों में त…

15

रेड्रोजी

1 साखियाँ

जन्म संवत् 1530-1620 तक अनुमानित है। ये हजूरी साधु थे। जाम्भोजी के पश्चात् रेड्रोजी की ही शिष्य परंपरा चली है। रेड्रोजी के शिष्य नाथोजी थे और नाथोजी के शिष्य वील्होजी थे। इस प्रकार…

16

वाजिद जी

1 साखियाँ

वाजिद जी का जन्म सं. 1530-1600 में था। इनकी यह एक साखी उपलब्ध हुई है। ये हजूरी कवि थे। साखी में इन्होनें संसार की असारता के बारे में बतलाया है।

17

लखमण जी गोदारा

1 साखियाँ

लखमण जी गोदारा जन्म संवत् 1530-1593 अनुमानित। इनके द्वारा रचित साखी पांच छन्दों की प्राप्ति हुई है। ये हजूरी शिष्यों में थे। इनको जाम्भोजी ने जैसलमेर के राज्य में राजदरबार में बसाय…

18

आलम जी

4 साखियाँ

आलमजी का जन्म सं. 1530-1610 में अनुमानित है। ये हजुरी कवि थे। जम्भसार में आलमजी की कथा विस्तार से वर्णित की है। इन्होनें अपने जीवन काल में अनेकों रचनाएँ की है। तथा गायन विद्या में…

19

रैदास (रविदास) धतरवाल

1 साखियाँ

जन्म वि. सं. 1530-1600 के मध्य अनुमानित है। ये गृहस्थ बिश्नोई जाम्भोजी के शिष्य थे। सत्संग सुनने और सुनाने के प्रेमी थे। यत्र-तत्र भ्रमणशील भी थे। इनके द्वारा रचित तीन हरजस एवं एक…

20

भींवराज

2 साखियाँ

जन्म 1530-1600 मध्य अनुमानित है। इनका दूसरा नाम भींया है। इनको ही जाम्भेश्वर जी ने सोवनी नगरी दिखाई थी। चितौड़ की कथा में भीमराज का नाम आता है। ये काशी में पढ़े हुए शास्त्रज्ञ थे।…

21

गुणदास जी

1 साखियाँ

गुणदास जी का जन्म 1560-1640 के मध्य अनुमानित है। इनके द्वारा रचित यह साखी मिली है यहां साखी में मिलजुल कर जीवन यापन करने का संदेश दिया है तथा जाम्भोजी की महिमा का वर्णन किया है।

22

लाखाराम

1 साखियाँ

लाखाराम जन्म संवत् 1560-1650 अनुमान से ज्ञात हुआ है। ये मारवाड़ के हजूरी संत बिश्नोई थे। इनकी एक साखी प्राप्त हुई है जो आगम साखी के नाम से प्रचलित है। ऐसी प्रसिद्धि है कि आगे कल्कि…

23

वील्होजी

10 साखियाँ

वील्होजी का जन्म विक्रम संवत् 1589 में हुआ था। निर्वाण संवत् 1673 निश्चित रूप से ज्ञात है। वील्होजी के सम्बन्ध में सुरजन जी, केशोजी,परमानन्द जी, गोविन्दराम जी, तथा साहबराम जी आदि स…

24

केशोदास जी गोदारा

15 साखियाँ

केशोदास जी गोदारा का जीवन संवत् 1630-1736 के मध्य में है। ये वील्होजी के प्रमुख शिष्य थे। बाल्यावस्था से ही वैराग्य धारण करके वील्होजी के शिष्य बन गये थे। वील्होजी के पश्चात् तथा उ…

25

सुरजनदास जी पूनियां

9 साखियाँ

सुरजनदास जी पुनिया का जन्म वि॰ सं॰ 1640 है तथा परलोक गमन संवत् 1748 में हुआ था। ये भींयासर गांव के पुनियां गोत्र से थे। बाल्यावस्था में ही वील्होजी के शिष्य बन गये थे। वील्होजी के…

26

माखनजी

1 साखियाँ

माखनजी का जन्म 1650-1750 मध्य अनुमानित है। ये नगीना के रहने वाले साधु थे। इनके द्वारा रचित राग खंभावची में गेय यह एक सोहलो प्राप्त हुआ है जो प्रायः प्रभात समय में प्रेम से गाया जात…

27

रामूजी खोड़

1 साखियाँ

रामूजी खोड़ का जन्म संवत् 1675-1700 के बीच अनुमानित है। ये धवा के रहने वाले सद्गृहस्थ बिश्नोई थे। संवत् 1700 में कापड़ हेड़ा में अनुचित कर छुड़वाते हुए स्वेच्छा से युद्ध करते हुए अ…

28

गोकुलजी

2 साखियाँ

गोकुलजी का जन्म संवत् 1700-1790 मध्य जीवन काल था। ये संत जोलियावाली गांव के निवासी थे। कवि गोकुलजी अपने समय के प्रतिनिधि कवि थे। इन्होनें इन्दव छन्द अवतार स्तुति होम की स्तुति आदि…

29

हीरानन्द जी

1 साखियाँ

हीरानन्द जी जन्म संवत् 1750-1800, इनको प्रसिद्ध रचना हींडोलणो प्राप्त हुई है जिसमें हजूरी कवि भक्तों तथा संतों के नाम गिनाये है इसलिये इस रचना का महत्व है।

30

हरजी वणियाल

9 साखियाँ

हरजी वणियाल जन्म संवत् 1745-1835 मध्य अनुमानित है। ये जांगलू के वणियाल गोत्र के बिश्नोई गृहस्थ थे। ये दामोजी के शिष्य थे। ऐसी प्रसिद्धि है कि हरजी ने स्वयं एक पोथी लिखी थी। उसका आध…

31

परमानन्द जी वणियाल

4 साखियाँ

जन्म वि. सं. 1750-1845 के मध्य अनुमानित है। ये जांगलू के ही रहने वाले बणियाल गोत्र के थे। परमानन्दजी ने अपने से पूर्व प्राप्त साहित्य का संग्रह किया था वह अब भी सर्वमान्य प्राचीन "…

32

ऊदोजी अडिंग

9 साखियाँ

वि. सं. 1818-1933 के मध्य जीवित रहे है। समाज में तीन ऊदोजी नाम से कवि भक्त हुए है। प्रथम ऊदोजी तापस दूसरे ऊदौजी नैण तथा तीसरे ऊदोजी अड़िंग। इन्होनें अपने जीवन काल में प्रहलाद चरित्…

33

गोविन्दरामजी

4 साखियाँ

"गोविन्दरामजी" का संवत् 1860-1950 के मध्य में जीवन समय था। साहबराम जी ने जम्भसार में गोविन्दरामजी की स्तुति करते हुए कहा है- गोविन्द तो गोविन्द सम जानो। गोविन्दरामजी ने अनेक फुटकर…

34

साहबराम जी

2 साखियाँ

"साहबराम जी" का जन्म वि. सं. 1871-1948 है इनकी निम्नलिखित रचना प्राप्त हुई है-सार शब्द गुंजार, और जम्भसार तथा दो साखियां जो प्रहलाद भक्त से सम्बन्धित है, एक प्रसिद्ध आरती भी साहबरा…

35

कुम्भाराम जी पूनियां

3 साखियाँ

कुम्भाराम जी पूनियां वि. सं. 1937 में जन्मे थे। ये जेगला के पुनिया गोत्र के थे। इन्होनें दीक्षा साधु हरिनारायण जी से ली थी। इनके द्वारा रचित दो पुस्तकें प्राप्त हुई है। "निर्वेद ज्…

36

साधु जगदीशराम जी

4 साखियाँ

"साधु जगदीशराम जी" जन्म संवत् 1960, ये भींयासर साथरी के भोलाराम के शिष्य थे। इनके लगभग बीस भजन, आरती, साखी, छन्द आदि प्राप्त हुए है। ये बिश्नोई प्राचीन कवियों की अन्तिम कड़ी कहे जा…

37

हरियो (योगी हरिराम जी)

1 साखियाँ

38

विविध छन्द

1 साखियाँ

39

रामकरण जी पूनियां

4 साखियाँ

40

अज्ञात कवि

20 साखियाँ

41

दामोजी

1 साखियाँ

42

सुरंदी

1 साखियाँ

43

पदम

1 साखियाँ

44

रंगीलो

1 साखियाँ

45

दीप

1 साखियाँ

46

केशोजी

1 साखियाँ

47

नानिग दास

1 साखियाँ

48

मधुकर

1 साखियाँ