कवि परिचय
रेड्रोजी
1 साखियाँ
परिचय
जन्म संवत् 1530-1620 तक अनुमानित है। ये हजूरी साधु थे। जाम्भोजी के पश्चात् रेड्रोजी की ही शिष्य परंपरा चली है। रेड्रोजी के शिष्य नाथोजी थे और नाथोजी के शिष्य वील्होजी थे। इस प्रकार से साधु परंपरा अब तक चली आ रही है। शब्दवाणी जो वर्तमान में प्रचलित है यह भी नाथोजी के कण्ठस्थ थी। नाथोजी ने ही आगे अपने शिष्य वील्होजी को सुनायी थी। वील्होजी एवं उनके शिष्य केशोजी एवं सुरजन जी ने लिपिबद्ध की एवं प्रचार-प्रसार किया। रेड्रोजी की एक साखी उपलब्ध है।