कवि परिचय
ऊदोजी अडिंग
9 साखियाँ
परिचय
वि. सं. 1818-1933 के मध्य जीवित रहे है। समाज में तीन ऊदोजी नाम से कवि भक्त हुए है। प्रथम ऊदोजी तापस दूसरे ऊदौजी नैण तथा तीसरे ऊदोजी अड़िंग। इन्होनें अपने जीवन काल में प्रहलाद चरित्र, विष्णु चरित्र, कक्का छतीसी एवं फुटकर साखियां एवं प्रसिद्ध रचना "लूर" की थी। एक समय जोधपुर के गांवों में ऊदोजी भ्रमण कर रहे थे उस समय होली के दिन थे। ऊदोजी ने देखा कि स्त्रियां अश्लील गाने गाते हुए नृत्य कर रही थी। उस समय ऊदोजी ने उन्हें मना किया और कहा ऐसे गाने नहीं गाने चाहिये। तब उन महिलाओं ने कहा कि इन होली के दिनों में हमें क्या गाना चाहिये। स्वामीजी आप ही बतला दीजिये? तब उसी जगह पर बैठकर यह "लूर" ऊदोजी ने गाकर सुनाई और बोले यह कृष्ण गोपियों का गीत गाया करो। वही लूर यहां नीचे दी जा रही है। जो समाज में बहुत ही प्रसिद्ध है।
इनकी साखियाँ
लूर राग सोरठ-129
गिरधर गोकुल आव, गोपी संदेशो मोकल्यो
साखी दोहा 130
सौ दिन हरि की भक्ति करे, एक दिन ध्यावै आण
साखी-131
मिनखा देही है अणमोली, भजन विना विरथा क्यूं खोवै
साखी-132
सहंस्र नाम संभाल, परभाते पूजा करो
साखी-133
आवो मिलो साधो मोमणों, रलि मिली जुमलै होय
साखी-133 "प्राणियां" राग सुहब
जग में तो दातार बड़ो रे, विधि सूं सुणों विचार
साखी-134
सतगुरु कृपा करी मेरा जीवो, केवल ज्ञान बतायो
साखी सोरठा-135
निस दिन श्वांस घटे मेरा जीवो, छः सौ इकीस हजारा
साखी राग गौड़ी-136
सेवगां सतगुरु बूझियो, तीर्थ कता कहावै