कवि परिचय
तेजोजी चारण
1 साखियाँ
परिचय
तेजोजी चारण श्री गुरु जाम्भेश्वर जी से पाहल लेकर बिश्नोई बने थे। इनको कुष्ट रोग था जाम्भोजी से भेंट वार्तालाप एवं जाम्भोजाव तालाब में स्नान करने से रोग की निवृति हो गई थी। जाम्भाणी साहित्य के अनुसार विक्रम संवत् 1480 से 1575 के बीच इनका जीवन काल था। इनकी विभिन्न रचनाऐं है। हरजस, छन्द, गीत, आदि सभी कुछ अध्ययन करने योग्य है। यहां पर उनके द्वारा रचित मात्र एक साखी का अनुवाद किया जा रहा है।