कवि परिचय
ऊदोजी नैण
14 साखियाँ
परिचय
जन्म विक्रम संवत 1505 तथा स्वर्गवास 1593। जाम्भाणी साहित्य में ऊदोजी नैण की कथा बड़ी रोचक एवं प्रेरणादायक है। पंथ में सम्मिलित होने से पूर्व गोठमांगलोद में महमाई मन्दिर के पुजारी थे। बिश्नोइयों की जमात के साथ जाम्भोजी की महिमा सुनकर सम्भराथल पर आये थे। जमात सहित जाम्भोजी का दर्शन ऊदोजी ने भी किया था। और ज्ञान वार्ता का भी श्रवण किया था ऐसा माहौल तथा विचार ऊदे ने प्रथम बार ही देखा था। ऊदो अपराधी की भांति पीछे छुपकर बैठा था। गुरुदेव ने ऊदे के अन्दर झांककर देखा था। उसमें कवित्व शक्ति की संभावना थी। उसे उजागर करने के लिये स्वयं गुरुदेव ने ऊदे को सम्बोधन करते हुए कहा-ऊदा तूं दूर क्यों बैठा है जरा सामने तो आओ। ऊदा अपनी करणी पर लज्जित होता हुआ सामने गुरु के चरणों में हाथ जोड़कर बैठा तब गुरुदेव ने कहा-भाई! कुछ भजन साखी तो सुनाओ। ऊदा ने हाथ जोड़ दिया और क्षमा मांगते हुए कहा- यदि आप कहो तो महामाता का भजन तो सुना दूं। गुरुदेव ने कहा-नहीं भाई! कुछ पिता के भी सुनाओ। पिता के भजन ऊदा कुछ भी नहीं जानता था। समिपस्थ बैठे हुए लोग ऊदे की अज्ञानता पर हंसने लगे, ऊदे को भी अपनी अज्ञानता पर हंसी आयी। गुरुदेव ने ऊदे के सिर पर हाथ रखा, वरद हस्त का स्पर्श होते ही अनुभव जागृत हो गया और तत्काल ही ऊदे ने प्रथम साखी का उच्चारण किया। ओ गुरु आयो। ऊदा गुरुदेव का शिष्य बन गया। महमाई की पूजा छोड़कर विष्णु की उपासना करने लग गया तथा गुरुदेव की सेवा में ही रहने लगा। ऊदे ने अपने जीवन काल में लगभग पन्द्रह साखियों की रचना की थी जो प्रायः जागरणों में गायी जाती है। तथा प्रसिद्ध चार आरतियों की रचना भी की थी जो नित्य प्रति गायी जाती है। इन रचनाओं के अतिरिक्त भी हरजस, सोहलौ, कूकड़ो, जखड़ी, छन्द, आख्यान कथाऐं आदि की रचना की थी। ऊदोजी तत्कालीन तथा अद्यपर्यन्त समाज के मान्य कवि है। इनकी रचनाऐं अत्यन्त महत्वपूर्ण एवं प्रामाणिक है। साहित्य कला की दृष्टि से भी वे अपना महत्व रखती है। यहां पर उनकी साखियों एवं आरतियों की व्याख्या प्रस्तुत की जा रही है। ऊदोजी की यह प्रथम साखी।
इनकी साखियाँ
साखी राग धनाश्री छन्दां की-25
ओ गुरु आयो झांभराज देव, निज हक साच पिछाणियो
साखी छन्दां की राग धनाश्री-26
गुरु की कथनि जुल्या मेरा बाबा, जहां का हरिया भाग
साखी छन्दां की राग धनाश्री-27
मैं तो म्हारो श्याम सपीहर, सिंवरीयो
साखी छन्दां की राग धनाश्री-28
गुरु पूरो दातार, म्हे छां थारा मंगता
साखी छन्दां की राग धनाश्री-29
बाजै बाजै रे मादलियां सरलै साध नै, स्वामीजी रा सबद सुहावणां
साखी छन्दां की राग धनाश्री-30
काया तो मोमण रतन सरीखी, पहरे लो मोमण कोई
साखी छन्दां की-31
नारायण नांव अनन्तो, अनन्त अवतार ज्यूं ध्याइये
साखी कणां की राग सुहब 32
जुमलै जुलिकै जाइये, जो दिल जुमलै होय
साखी कणां की-33
दीने जागो दीने जागो, ओ गुरु परगट आयो
साखी कणां की-34
हम परदेसियां हो जी, ओ देसड़लो बिडाणो
साखी कणां की-35
अहरण नांहि हथोड़ा नांहि, पाणि सूं खालक राजा पिण्ड घड़े रे
साखी राग राम गिरी-36
जागो मोमणों नां सोवो, न करो नींद पियार। जैसा सुपना रैण का, ऐसा ओ संसार
साखी राग रामगिरि-38
पायल घड़दे रे सुघड़ सुनारा, भांजण घड़ण संवारण हारा
साखी-39
सींवरो सतगुर सांम्य, आदि विसनै संभु सही