मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह144 / 156

साखी-143

आतम गंग न्हावो भाई, जांसूं सर्व पाप कट जाई

कवि: कुम्भाराम जी पूनियां

कवि परिचय — कुम्भाराम जी पूनियां

कुम्भाराम जी पूनियां वि. सं. 1937 में जन्मे थे। ये जेगला के पुनिया गोत्र के थे। इन्होनें दीक्षा साधु हरिनारायण जी से ली थी। इनके द्वारा रचित दो पुस्तकें प्राप्त हुई है। "निर्वेद ज्ञान प्रकाश" व "पंथ यज्ञ प्रश्नोत्तरी मणि भाषा" तथा अन्य साखियां तथा भजन भी प्राप्त हुए है।

इस रचना का भावार्थ उपलब्ध नहीं है।

आतम गंग न्हावो भाई, जांसूं सर्व पाप कट जाई ।

भूल्या जीव भटकत है बाहर, भटक भटक मर जाई ।

अड़सठ तीर्थ है तन मांही, गुरु विन लख्या न जाई ।

गंगा जिमुना चले सरस्वती, त्रिवेणी इक ठाई ।

तन में तीर्थ न्हाय जगत से, सतगुरु शरणै जाई ।

ओमकार जप दान गिणीजै, मोक्ष मुक्ति फल पाई ।

जो कोई चावै मुक्ति अपनी, तो न्हावो तन मांही ।

संचित आगम कर्म मिटे सब, बहुरी जन्म नहीं आई ।

इस विध न्हाय लहो तन तीर्थ, पाप मिटे छिन मांही ।

कर सतसंग न्हाय नित हित से, कहै संत समझाई ।

कुम्भाराम त्रिवेणी न्हाई, सतगुरु विधि बताई ।

अनंत जन्म का पाप धोय के, जीवन मुक्ति पाई ।