मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह89 / 156

साखी छन्दां की राग धनाश्री-89

सिले पछिम रे देश, हिंवर तुरी पलाण सी

कवि: केशोदास जी गोदारा

कवि परिचय — केशोदास जी गोदारा

केशोदास जी गोदारा का जीवन संवत् 1630-1736 के मध्य में है। ये वील्होजी के प्रमुख शिष्य थे। बाल्यावस्था से ही वैराग्य धारण करके वील्होजी के शिष्य बन गये थे। वील्होजी के पश्चात् तथा उनके साथ में ही समाज में धर्म प्रचार तथा विकास में उनका अटूट सहयोग था। ये कवि की सभी कलाओं में निपुण थे। केशोजी ने अपने जीवन काल में अनेकों रचनाएँ की थी जिनमें आख्यान कथाएँ, छन्द, कवित, दोहा, साखी आदि प्रसिद्ध है। केशोजी द्वारा रचित प्रहलाद चरित्र आदि अति प्रसिद्ध एवं बहुत ही उच्च कोटि की रचना है। जो इस समय प्रकाशित की गई है केशोजी ने उन्नीस साखीयों की रचना की थी उनमें से 14 साखियां यहां पर है। इनके द्वारा विरचित अधिकतर साखियां जागरणों में गायी जाती है। इससे ही इनकी प्रसिद्धि का पता चलता है। जाम्भाणी साहित्य में केशोजी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। यहां पर आगे केशोजी द्वारा रचित केवल साखियों का भावार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है।

सिले पछिम रे देश, हिंवर तुरी पलाण सी । सतगुरु होयसी साथ, खड़ लसकर गढ़ आवसी । खड़ा लसकर कोटि दिल्ली, दांणौ सूं जुध मांडसी । खरा खोटा री खबर लेसी, नाज निरंतो बांटसी । खरच खालक देवे मुक्ति, दाणों के दल दीजसी । जोड़ कर जगदीश आयो, सिले पछिम रे कीजसी ।१।

यहां पर इस साखी में कवि ने कल्कि अवतार होगा इसकी कल्पना की है । वह कैसा और किस प्रकार से होगा इसका वर्णन किया है । पश्चिम देश के उस किनारे से कल्कि अवतार का आगमन होगा जो हिंवर जाति के घोड़े पर सवार होकर आयेगा अर्थात् पश्चिम देश अमेरिका से तेज वाहन पर सवार होकर सम्पूर्ण विश्व को कंपायमान करते हुए आयेगा । साथ में सतगुरु भी मार्ग दृष्टा के रूप में होंगे । उनके साथ में अन्य छः प्रकार का सैन्य दल होगा । अपने लसकर सैन्य दल के साथ अनेक देशों को पार करते हुए दिल्ली तक पहुंचेगा । दानवों से युद्ध होगा, उनमें सुर-असुर खरा खोटा की खबर ली जायेगी । निर्णय किया जायेगा । दीन दुखी भूखे प्यासे पर कृपा करके उन्हें अन्न जल प्रदान करेंगे । जो उनकी शरण ग्रहण करेंगे उनको तो मुक्ति प्रदान करेंगे । तथा दानवों का विनाश करेंगे । जो व्यक्ति नम्रता से हाथ जोड़कर आयेंगे उन्हें तो अपना बनायेंगे । इस प्रकार से पश्चिम के किनारे से कल्कि अवतार आयेंगे ।१।

सहंसे किरणे सूर, सतगुरु फेर तपावसी । शरणे रहसी साध, असुरां देव दझायसी । असुर दाझे हुवै घाणो, आंच लागै आकरी । कोपियो करतार मारै, देखी दूलम यों डरी । कालिंगे को काल करसी, आंके कलि के आयसी । धरणी हूं तां नव नेजां, सूरज फेर तपावसी ।२।

हजारों किरणों वाले सूर्य को फिर से तपायेंगे । सम्पूर्ण दुनिया जल उठेगी । जो साधु सज्जन पुरूष है वे तो शरण ग्रहण करेंगे किन्तु असुरों को जला देंगे । असुर जलेंगे तथा रोयेंगे उन्हें आंच में पकाया जायेगा । कर्त्ता कुपित होकर इस प्रकार से असुरों को मारेंगे, यह दृश्य देखकर सम्पूर्ण दुनिया डर जायेगी । कलयुग का अन्त करने के लिये कलयुग की समाप्ति पर भगवान स्वयं आयेंगे । इस धरती पर धर्म की नयी ध्वजा फहरायेंगे और ज्ञान का प्रकाश सूर्य सदृश फिर से फैलायेंगे ।२।

दुल दुल चढ़िसी देव, जुध करसी जीवां धणी । चीण म चीण कटक, फोजा फरहरसी घणी । फरहरे फोजा धरणी धूजै, आसमान उपर थरहरै । पवन सूं पर्वत डोलै, छत्र निकलंक सिर धरै । पांच सात नव कोटि बारा, जाय इक वीसां मिलै । तिधारो तिण बार सजसी, देव चढ़सी दुल दुले ।३।

जीवों के स्वामी ईष्वर तेजस्वी वाहन पर सवार होकर युद्ध करेंगे, उनके साथ चीन देश, कटक देश आदि की फौज भी साथ देगी और अपना जौहर दिखायेगी । जब सेना साथ चलेगी तो धरती को कंपायमान कर देगी । आसमान भी धूए से धूसरित हो जायेगा । जब उनकी सेना वेग से चलेगी तो उनके द्वारा उठे हुए तुफान से पर्वत भी डोलने लग जायेंगे । उस समय सभी देशों के एक ही छत्रपति सम्राट भगवान कल्कि ही होंगे । प्रहलाद से बिछुड़े हुए जीव प्रहलाद की परंपरा के अनुसार ही परमात्मा में जाकर मिल जायेंगे । तीन धार वाली खड़ग हाथ में शोभायमान होगी और देव स्वयं तेजस्वी वाहन पर सवार होकर भयंकर युद्ध करेंगे ।३।

मिले तेतीसों क्रोड़ करै, उमाहो पार को । नाचे अपछरां पात, मेलो गुरु दीदार को । मेलो तो दीदार को, सुन्दरी एक मन होय खड़ी । साधां को सुख अनंत देसी, रतन काया हीरा जड़ी । कांमणी करतार मेलो, रूप रंभा अति भली । तां बीच बासो कह केसो, क्रोड़ तेतीसूं मिली ।४।

भगवान के अवतार का मुख्य प्रयोजन भी भटके हुए जीवों को पार उतारना है । भगवान की अहैतुकी कृपा से जब जीव पार पहुंच जायेंगे तो आगे तेतीस करोड़ देवताओं से मिलान होगा । आनन्द की कोई सीमा ही नहीं रहेगी । वहां पर अप्सराऐं नृत्य गान करती हुई स्वागत करेगी । दया स्वरूप प्रभु से प्रेम पूर्वक भेंट करवायेगी । यदि मिलना है तो दयालु गुरुदेव से ही मिलन करें ऐसा कहती हुई पवित्र अप्सराऐं हाथ जोड़े खड़ी रहेगी । सभी का एक मत यही होगा । साधु सज्जनों को अनन्त सुख की प्राप्ति होगी । उन्हें आगे रत्न सदृश दिव्य हीरों से अलंकृत काया मिलेगी । स्वरूप गुणों से युक्त अनेकों अप्सराऐं युवतियां आगे मिलेगी । केशोजी कहते है कि उनके बीच में ही भक्तों का निवास होगा वे सदा ही सेवा में तत्पर रहेगी इस प्रकार से भगवान तेतीस करोड़ से मिलान अवश्य ही करवायेंगे ।४।