साखी राग हंसो-54 (केशोजी द्वारा रचित)
सतगुरु जी साहेब सीरजण हार, थल्य सीर आयो जी दुख मेटण दातार
कवि: केशोजी
सतगुरु जी साहेब सीरजण हार, थल्य सीर आयो जी दुख मेटण दातार ।१।
दुख मिटाने वाले, सर्व सृष्टि की सृजना करने वाले, सतगुरु साहिब दाता सम्भराथल पर आये है ।१।
कोड़या बारां क काज जी, गुर झंभ लीयो अवतार ।२।
बारह करोड़ जीवों के उद्धार हेतु गुरु जाम्भोजी ने अवतार लिया है ।२।
म्हान देवजी मीलिया जी, कल्य दसवै अवतारय ।३।
देव स्वरूप सतगुरु ने हमको दसवें अवतार कल्कि से मिलाया है ।३।
हम लोभी लबधी जी, त्रीकम तारण हार ।४।
हम तो लोभी लब्धी कुलालची है, हमें तो त्रिकम त्रिमूर्तिधारी भगवान विष्णु ही पार उतारने वाले यहां पर कृपा करके आये है ।४।
हम खुनी थारा जी, तुं बाबल बकसण हार ।५।
हम तो आपके अपराधी है, बहुत से अपराध जन्मों-जन्मों में करते आये है, किन्तु आप तो हमारे पिता हो, हमारे गुन्है माफ कर दोगे ।५।
चौ खैणी फिरीयाया जी, जंभ न छाड़ लार ।६।
हम तो चारों खैण में अनेक प्रकार की जीव योनियों में भटकते हुए आये है । बार-बार यमदूतों के फंदे में फंसे है, अब तो आप ही छुड़ाने वाले है ।६।
सेख सदो नीवाज्यो जी, खीयै सुखाल्यक जी ।७।
हे गुरुदेव आप ही ने तो शेख सदो को झुकाया था, मरती गऊवें छुड़वायी थी, उन्हें नमन करना, जीवों पर दया करना सिखलाया था ।७।
कीवीं महर मुरारी जी, बोह पापी तारया जी ।८।
हे मुरारी ! आपने मेहर करके अनेकों पापियों को पार उतारा है ।८।
नर नारी बोह नारी जी, दोय रावण गोयंद जी ।९।
साम्य कीया सु चीयारा जी ।१०।
अनेकों नर-नारी, छोटे बड़े पापी-पुण्यवान जनों को कृपा करके संसार सागर से पार उतारा है । रावण गोयंद जो पशु चोर थे उन्हें भी आपने चोरे हुंता साधु किया था ।१०।
दीन केसो बोल जी, म्हारी आवागुवैण्य नीवारो जी ।११।
गरीब केशो बोल रहा है, आपसे विनती कर रहा है कि हमारा भी जन्म मरण के चक्कर से पीछा छोड़ा दीजिये जी, यही शुभ कामना है । स्वीकार करें जी ।११।