कवि परिचय — कुम्भाराम जी पूनियां
कुम्भाराम जी पूनियां वि. सं. 1937 में जन्मे थे। ये जेगला के पुनिया गोत्र के थे। इन्होनें दीक्षा साधु हरिनारायण जी से ली थी। इनके द्वारा रचित दो पुस्तकें प्राप्त हुई है। "निर्वेद ज्ञान प्रकाश" व "पंथ यज्ञ प्रश्नोत्तरी मणि भाषा" तथा अन्य साखियां तथा भजन भी प्राप्त हुए है।
इस रचना का भावार्थ उपलब्ध नहीं है।
साधो भाई ऐसा देश हमारा, जहां नहीं काल का चारा ।टेक।
स्वयं प्रकाश एक जोत विराजै, नहीं चन्द नहीं तारा।
अग्नि सूरज वहां नहीं पहुंचे, विना भान उजियारा।
जन्म मरण दुख वहां नहीं पहुंचे, अजर अमर सुखारा।
सत रज तम गुण वहां नहीं पहुंचे, मूल माया से पारा।
ऐसे देश पहुंचे विरला, जिन लिया संता का सहारा।
अगम देश की अद्भुत रचना, पुकार कहै संत सारा।
अद्भुत महिमा ताकी वरणी न जावै, वेद संत सब हारा।
जाम्भो कुम्भो हरि द्वितीय नाही, ब्रह्म जोत इकसारा।