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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह42 / 156

साखी कणां की-42

मेरे कानां आवाज हुई, अवतार लियो संसारा

कवि: रायचन्द सुथार

कवि परिचय — रायचन्द सुथार

कवि रायचन्द सुथार - 23, जन्म 1525-1610 इनके बारे में जम्भसार में परिचय मिलता है। ये हजूरी कवि थे। जाम्भोजी के साथ में रहते थे। भजन गायन करते थे। इनके द्वारा रचित छः साखियां प्राप्त है। सभी महत्वपूर्ण एवं गेय है। प्रथम साखी यह जाम्भोलाव तालाब की है।

मेरे कानां आवाज हुई, अवतार लियो संसारा ।१।

कवि कहते है कि मेरे कानों में आवाज संदेश आया है कि विष्णु ने इस मरूभूमि में अवतार लिया है ।१।

सम्भराथल गुडी उछली, आयो किसन मुरारा ।२।

सम्भराथल पर धर्म रूपी पतंग उड़ रही है क्योंकि स्वयं ही कृष्ण मुरारी आये है ।२।

करणी क्रिया फरमाई, जांतै लंघियो पारो ।३।

यहां पर आकर विशेष रूप से कर्त्तव्य कर्म तथा शुद्ध क्रियाऐं बतलाई है इन्हें जो भी अपनायेगा वह संसार सागर से पार उतर जायेगा ।३।

क्षमा दया अरू भक्ति करो, केवल नांव उचारो ।४।

क्षमा दया भक्ति करने का आदेश दिया है तथा केवल विष्णु का ही स्मरण करना बतलाया है ।४।

पराई निंदा कभु न करो, मत बांधो सिर भारों ।५।

परायी निंदा न करो क्योंकि परायी निंदा करना अपने सिर पर व्यर्थ का बोझ उठाना है क्यों सिर पर भार उठाये फिरते हो ।५।

चोरी जारी न कभी करो, परहरियो अहंकारो ।६।

चोरी जारी कभी मत करो, तथा अहंकार का भी परित्याग करके परमात्मा के समर्पित हो जाओ ।६।

चोह जुग बिछड़िया मिले, विसन को अवतारो ।७।

चारों जुगों के बिछुड़े हुए हम लोगों को अब विष्णु के अवतार जाम्भोजी से भेंट हो सकेगी ।७।

रायचंद बोले बीणती, साधां संग पार उतारो ।८।

रायचंद जी विनती करते हुए कहते है कि साधु की संगति से ही पार उतर सकते हो। कवि का ऐसा कथन है कि ऐसी आवाज मेरे कानों में आयी है इसलिये मैं सतर्क हो गया हूं तथा आप भी हो जाइये ।८।