कवि परिचय — साधु जगदीशराम जी
"साधु जगदीशराम जी" जन्म संवत् 1960, ये भींयासर साथरी के भोलाराम के शिष्य थे। इनके लगभग बीस भजन, आरती, साखी, छन्द आदि प्राप्त हुए है। ये बिश्नोई प्राचीन कवियों की अन्तिम कड़ी कहे जा सकते है। आधुनिक कवियों एवं प्राचीन कवियों के बीच में सेतु का कार्य कर रहे है। नीचे एक साखी दृष्टव्य है यह साखी सरल भाषा में वेदान्त योग के विषय को उजागर करती है।
इस रचना का भावार्थ उपलब्ध नहीं है।
सतगुरु दरसण म्हे जास्यां, निज पुरबली प्रीत पिछाणी ए माय।
तन मन भूली सुधी बुधी भूली, चरणां में लिपटाणी ए मांय।
कथा प्रसंगा नित नव रंगा, चरचा रूचि उपजाणी ए मांय।
हरिगुण गुणस्यां हिरदै मां भणिस्यां, सुणी सुणी अमृतवाणी ए मांय।
हरि रंग राची प्रेम सूं नाची, रोम रोम विगसाणी ए मांय।
उदो दासा प्रेम प्रकाशा, हरि में सुरत समाणी ए मांय।