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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह१५ / 15

ओम जय जगदीश हरेभक्त जनों के संकट, छिन में दूर करै

ओम जय जगदीश हरे, प्रभु जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, छिन में दूर करै । टेर ।

जो ध्यावै फल पावै, दुख विनसै मन का। सुख सम्पति घर आवै, कष्ट मिटे तन का । १ ।

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी। तुम विन ओर न दूजा, आस करूं जिसकी । २ ।

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामि । पार ब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी । ३ ।

तुम करूणा के सागर, तुम पालन कर्ता । मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता । ४ ।

तुम हो एक अगोचर, सब के प्राण पति । किस विध मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति । ५ ।

दीन बन्धु दुख हर्ता, तुम ठाकुर मेरे । अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे । ६ ।

विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा । श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा । ७ ।