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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह9 / 16

भजन 9

अमरलोक सूं म्हारा जाम्भोजी पधारिया

अमरलोक सूं म्हारा जाम्भोजी पधारिया, घर लोहट अवतार लियो सिरिया झीमाबाई करे थारी आरती,

चंवर ढ़ुलावे आलम सालम जीओ सोने रे सिंहासन माथे जाम्भोजी विराजीया, भगत उतारे थारी आरती जीओ

जींझा मजीरा थारे बाजे मंदिर में, झालर री झणकार जीओ नौपत नगारा थारे गहरा गहरा बाजे, शंखा रा बाजे तुंताड़ जीओ

घृत गूगल थारे चढ़े मिठाई, आवे कपूर महकार जीओ। प्रेमभाव से थाने मनावे, निवण करने नर नारी जीओ ।

खुला थारा पडिय़ा पोल दरवाजा, धोक लगावे नर नारी जीओ । केर कुमटिया चोखा घणा लागे, और फोगां री झाड़ी जीओ ।