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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह7 / 16

भजन 7

ठुमक-ठुमक देखो आवे जम्भराज

ठुमक-ठुमक देखो आवे जम्भराज, हंसा जो मगन भई देख्यो ऐसो साज ।

आगे आगे गऊआं चाले, पीछे चाले ग्वाल, सारां बीचे चाले हंसा लोहटजी रो लाल । 1।

आवत देखी गऊआं नगर की नार, हंसा आगे सखियां करे पुकार । 2।

सिर पे सुहावे टोपी, गले काली माल, कांधे धर गेडी चाले, अद्भुत चाल । 3।

बोले नहीं मुखड़े सूं करे सब काज, लीला ज्यारी लखी नहीं, पीपासर समाज । 4।

पूर्ण ब्रह्म रूप धार लियो भेष, पार नहीं पावे, ब्रह्मा विष्णु महेश । 5।

ओ ही लोहट सुत, ओ ही कृष्णमुरार, सेवक आलम गुण रहयो उचार । 6।