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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह11 / 16

भजन 11

तर्ज - अब लौट के आजा मेरे मीत

तर्ज- अब लौट के आजा मेरे मीत...

अब दर्शन देवो जम्भदेव, भगत तेरे द्वार पे आये हैं । टेर।

पन्द्रह सौ और साल आठ में थे पीपासर आया । माता हंसा गोद खिलाया, लोहट मन हर्षाया ।

रहे सात वर्ष तक मौन, बाल लीला दिखाई है । अब दर्शन देओ.......... । 1।

दूदेजी ने खाण्डो दीन्हो, राज मेड़तो पायो। लोहटजी ने देख्यो अचम्भो, आंगन जल बरसायो ।

वर्ष बीस और सात, ग्वालों संग धेनु चराई है । अब दर्शन देओ.......... । 2।

पन्द्रह सौ और साल बंयाले बिश्रोई पंथ चलायो । जात पांत रो भेद मिटाकर, अमृत पाहल पिलायो।

दीन्हो वर्ष इक्यावन ग्यान, धर्म की धजा फहराई है । अब दर्शन देओ.......... । 3।

उमाबाई ले बत्तीसी, समराथल पर आई रोटू गांव में बाग लगायो, खेजडिय़ां उगाई ।

भर्यो ठाट -बाट सूं भात, उमा ने बहन बणाई है। अब दर्शन देओ.......... । 4।

विष्णुं- विष्णुं तूं भण रे प्राणी, ओ ही मंत्र सिखायो । पन्द्रह सौ और साल तेणवें ज्योति में रूप समायो ।

करे रामरतन गुणगान, दर्शन की आश लगाई है । अब दर्शन देओ.......... । 5।