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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह10 / 18

रचना 10

बालक मन्त्र

ओम् शब्द गुरु देव निरंजन। ता इच्छा से भये अंजन।। हरि के हाथ पिता के पिष्ट। विष्णु माया उपजी सिष्ट।। सप्तधात को उपज्यौ पिंड। नौ दस मास बालो रह्यो अघोर कुंड।। अरध मुख ता उरध चरण हुतास। हरी कृपा से भया खलास।। जल से न्हाया त्याग्या मल। विष्णु नाम सदा निरमल।। विष्णु मंत्र कान जल छूवा। श्री जम्भगुरु कृपा से विश्नोई हुवा।।