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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह12 / 18

रचना 12

चौपाई - जैमे भानु उदय उजियारो।

जैमे भानु उदय उजियारो। दूरि करै जग को अन्धियारो।।1।। तैसे जम्भ गुरू जग मांही। सदुपदेश दे तिमिर नशांही॥2॥ सब शिष्यन के अघ प्रभु हरता। विज्ञानोदय मन में करता।3।। ऐसा सुना महा उपकारी। क्षण में दे संशय सब टारी।।4।। ऐसो है गुरू जम्भ विवेकी। जग में विचरै एकाएकी।।5॥ हे जम्भेश्वर परम दयालु। दूरी करो अज्ञान कृपालु।6॥ हृदय ग्रन्थि सब दूरि भगाओ। मेरे सब सन्देह मिटाओ।7॥ धर्म संख्या द्यो मुझे समुझाई। पृथक् पृथक् अब देओ सुनाई।8॥ जम्भेश्वर गुरू शब्द सुनायो, जोगी का सन्देह नशायो।।9।