रचना 17
कवित :- जोगी जंभ देव जटा जूट धारी
जोगी जंभ देव जटा जूट धारी शंभु जैसे, भव्य देह भ्राजत है भगवा सुवेश में। परम प्रंचंड दौर दंड दंभ खंडन को, मंडन महान धर्म देशरू विदेश में। ज्ञान की दशा में उन्मत्त विष्णु भक्त भारी, दत्त अवधूत जैसे देन उपदेश में। शेष में सुरेश में दिनेश में न एते गुण, तेते गुण गुरु में विराजत विशेष में।