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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह8 / 18

रचना 8

साधु गुरु मन्त्र

ओं शब्द सोहं आप। अन्तर जपै अजप्या जाप।। सत्य शब्दले लंघै घाट। बहुरि न आवै योनि वाट।। परसै विष्णु अमृत रस पीवै। जरा न व्यापै युग युग जीवै।। विष्णु मंत्र है प्राणाधार। जो कोई जपै सो उतरै पार।। ओं विष्णु सोहं विष्णु तत स्वरूपी तारक विष्णुः।।