शब्द 66
ओ३म् ऊमाज गुमाज पंज गंज यारी, रहिया कुपहिया शैतान की यारी।
शैतान लो भल शैतान लो, शैतान बहो जुग छायों। शैतान की कुबध्या न खेती, ज्यूं काल मध्ये कुचीलूं।
वे राही वै किरियावन्त कुमती दौरे जायसी, शैतानी लोड़त रलियों। जां जां शैतानी करै उफारूं, तां तां महंत न फलियो।
नीले मध्ये कूचील करबा, साध संगीणी थूलूं। पोहप मध्ये परमला जोति, यूं सुरग मध्ये लीलूं।
संसार में उपकार ऐसा, ज्यूं घण बरषंता नीरूं। संसार में उपकार ऐसा, ज्यूं रूही मध्ये खीरूं।