मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह
शब्द 66 / 120

छपय

नैते को पकड़यो सही, अरू टोडो मार्यो आय।

चारण सूं ऐसे कह्यो, उलटा गीत कहाय।

शब्द 66

ओ३म् ऊमाज गुमाज पंज गंज यारी, रहिया कुपहिया शैतान की यारी।

शैतान लो भल शैतान लो, शैतान बहो जुग छायों। शैतान की कुबध्या न खेती, ज्यूं काल मध्ये कुचीलूं।

वे राही वै किरियावन्त कुमती दौरे जायसी, शैतानी लोड़त रलियों। जां जां शैतानी करै उफारूं, तां तां महंत न फलियो।

नीले मध्ये कूचील करबा, साध संगीणी थूलूं। पोहप मध्ये परमला जोति, यूं सुरग मध्ये लीलूं।

संसार में उपकार ऐसा, ज्यूं घण बरषंता नीरूं। संसार में उपकार ऐसा, ज्यूं रूही मध्ये खीरूं।