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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह०७ / 15

आरती कीजे नरसिंह कंवर कीवेद विमल यश गावे मेरे स्वामी जी की

आरती कीजे नरसिंह कंवर की, वेद विमल यश गावे मेरे स्वामी जी की।। पहली आरती पहलाद उबारे, हिरणाकुश नख उदर बिदारे। दूसरी आरती बावन सेवा, बलि के द्वारे पधारे हरि देवा । तीसरी आरती वैकुण्ठ पधारे, सहस्त्राबाहु जी के कारज सारे । चौथी आरती असुर संहारे, भक्त विभीषण लंक बैठाये। पांचवीं आरती कंस पछाड़े, गोपियां ग्वाल सदा प्रतिपाले । तुलसी के पात जो घट घट हीरा, हरि के चरण गुण गावे रणधीरा ।