ओम जय जम्भेश हरे — प्रभु जय जम्भेश हरे
ओम जय जम्भेश हरे, प्रभु जय जम्भेश हरे । तुमरो नाम रटत ही, कोटिक जीव तरे। टेर । पूरण ब्रह्म दयामय, शंकर अवनाशी । विष्णु रूप धरता, घट घट के वासी ।१। तुम हो सर्व गुणां कर, सतगुरु ओमकारा । नेति नेति कहि गावै, नहीं पावै पारा ।२। परमानन्द नारायण, निश्चय जगदीशा । शिव ब्रह्मादिक नवावत, तुमको नित शीशा ।३। तुम हो अलख निरंजन, आनन्द के देवा । तीन ताप मिट जाते, करते ही सेवा ।४। प्रभु तुम दीन दयालु, संतन हितकारी । कर में माल सुहावत, मुख शोभा न्यारी ।५। सम्भराथल पे विराजे, जग पालन कर्ता । झिगमिग ज्योति प्रकाशे, भव दुख के हर्ता । ६ । जम्भदेव की आरती, सेवक जन गावै । परमानन्द लूटकर, हरि दर्शन पावै ।७।