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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह०९ / 15

ओम जय जम्भेश हरेप्रभु जय जम्भेश हरे

ओम जय जम्भेश हरे, प्रभु जय जम्भेश हरे । तुमरो नाम रटत ही, कोटिक जीव तरे। टेर । पूरण ब्रह्म दयामय, शंकर अवनाशी । विष्णु रूप धरता, घट घट के वासी ।१। तुम हो सर्व गुणां कर, सतगुरु ओमकारा । नेति नेति कहि गावै, नहीं पावै पारा ।२। परमानन्द नारायण, निश्चय जगदीशा । शिव ब्रह्मादिक नवावत, तुमको नित शीशा ।३। तुम हो अलख निरंजन, आनन्द के देवा । तीन ताप मिट जाते, करते ही सेवा ।४। प्रभु तुम दीन दयालु, संतन हितकारी । कर में माल सुहावत, मुख शोभा न्यारी ।५। सम्भराथल पे विराजे, जग पालन कर्ता । झिगमिग ज्योति प्रकाशे, भव दुख के हर्ता । ६ । जम्भदेव की आरती, सेवक जन गावै । परमानन्द लूटकर, हरि दर्शन पावै ।७।