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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह27 / 94

तीसरा अध्याय · कथा 27

चारणी को शब्दोपदेश

वील्होजी उवाचः- हे गुरुदेव! इस संसार में सार वस्तु क्या है? और असार क्या है? ऐसी बातें बतलाइये, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाय।

नाथोजी उवाचः- सार-असार सम्बन्धी शब्द श्री योगेश्वर ने चारणी को बतलाया था। वही कथा एवं शब्द में तुम्हें बतलाता हूँ। हे शिष्य! मैंने शब्द इन्हीं कानों से सुना है और चारणी तथा श्रीदेवजी को वार्तालाप को मैंने हृदयांगम किया है।

श्री जम्भेश्वरजी के द्वारे पर एक चारणी आयी थी। उसने अपने गले का चांदी का हार उतार क रके श्री देवजी के चरणों में चढ़ाया था। किन्तु जम्भेश्वरजी ने वह हार लिया नहीं। देवजी ने कहा-हे चारणी! यह हार मेरे कौन पहनेगा? न तो मेरे बेटा है और न ही बहू है। इसलिए इस हार को तुम वापिस ले लो। ऐसा कहते ही चारणी ने हार वापिस ले लिया।

चारणी कहने लगी-हे देवजी! आपके तो चेले भक्त बहुत हैं। स्वयं भी तो आप दाता हैं। मुझे एक ऊँट दिलवा दीजिये। श्री देवजी ने पूछा-हे चारणी! तू ऊँट से क्या करेगी? हे देव! ऊँट पर सवार होकर आपके नाम का प्रचार करूँगी।

पूछा कितनी दूर तक? चारणी कहने लगी-देवजी के दीवाण्य एक चारणी आयी आय बाललो रूपे को चाडयो चाडि, अरज वमण लागी। जाम्भाजी एक मोने ऊंट द्यो हुं, थाहरो जस करस्यूं, थाहरों नाव करस्यूं, थान प्रकट करेस्यों, देवजी कह कीति एक दूरी प्रगटा करिष्य, चमणी कह बाहड़मेर, कोटड़, चीतौड़, सांगानेर, मेड़ते, नागौर,मंडोवर,जैसलमेर नव कोटि मारवाड़े, मांह नांव करस्यो।। जाम्भोजी श्रीवायक कहे-

बाडमेर आदि नगरों एवं गाँवों में आपके यश का विस्तार करूँगी, ढ़ोल भी बजाऊँगी। मुझे एक ऊँट दिलवा दो, तो आपको बड़पण मिलेगा। अन्यथा आपका यश नहीं फैलेगा। दुनिया के लोग कहेंगे कि चारणी देवजी के पास गयी थी, किन्तु खाली हाथ लौट आयी। श्री जम्भेश्वरजी ने शब्द सुनाया-

शब्द-21 ओ३म्- जिहिं के सार असारू,पार अपारूं, थाघ अथाघूं।

उमग्या समाघूं, ते सरवर कित नीरूं।

बाजा लो भल बाजालो, बाजा दोय गहीरूं।

एकण बाजैं नीर बरसै, दूजै महीं बिरोलत खीरूं।।

जिहिं के सार असारूं, पार अपारूं, थाघ अथाघूं।

उमग्या समाघूं, गहर गंभीरूं, गगन पयाले, बाजत नादूं।

माणक पायो फेर लुकायो, नहीं लखायो।

दुनियां राती बाद बिवादूं, बाद विवादे दांणूं खीणां।

ज्यूं पहूपे खीणां, भंवरी भंवरा, भावै जाण म जाण।

पिराणी जौले का रिप जंवरा।।

भेर बाजातो एक जोजनो, अथवा तो दोय जोजनो।

मेघ बाजातो पंच जोजनो,अथवा तो दश जोजनो।

सोई उतम लेरे प्राणी, जुगां जुगांणी सत करि जाणी।

गुरु का शब्द ज्यूं बोलो झीणी बांणी, जिहिं का दूरां हुते

दूर सुणीजै सो शब्द गुणा कारूं, गुणा सारूं, बले अपारूं

हे चारणी! जिसको तू सार समझती है। ढ़ोल बजाना, दूसरे की चापलूसी करना, यह सार नहीं है। तू सोचती है कि मैं इससे पार हो जाऊँगी, यह संभव नहीं है। तूं यह समझती है कि मैंने जीवन का थाघ प्राप्त कर लिया है। जीवन के लक्ष्य की प्राप्ति इतनी ही है तो तू भूल में है। कूप मण्डूक मत बन, इससे भिन्न भी जीवन है। जो आनन्द का भण्डार है। उसे प्राप्त करने की कोशिश कर। इस संसार में कितना सा सुख है? अत्यल्प है। यह भी सार नहीं है।

हे चारणी! तुमने बाजा बजाने की बात कही है। बाजे तो दो ही दुनिया में प्रसिद्ध हैं। एक बाजा हमारे यहाँ बजता है, गर्जना होती है, तो वर्षा होती है। दूसरा बाजा भी बजता है, तब दही में से मक्खन निकलता है और यह बाजा तो तब भी बजा था, जब समुद्र मंथन किया था, उससे अमृत निकला था।

हे चारणी! तुम्हारा यह कौनसा बाजा है? यह ढ़ोल ही तुम्हारा बाजा है। यह तो बिल्कुल ही थोथा है। ये तुम्हारे दूर के ही ढ़ोल सुहावने हैं। किन्तु इसमें कुछ भी सार नहीं है। नाद ध्वनि भी एक बाजा है। वह स्वतः ही बजता है। उसको सुनने से भी समाधि की प्राप्ति होती है। अपार सुख की प्राप्ति होती है। ऐसा बाजा तथा गाना ही श्रेष्ठ है।

हे चारणी! तुम्हें यह मानव शरीर मिला है। यह माणिक है, सर्वश्रेष्ठ है। किन्तु यह हाथ से निकल जायेगा। समय रहते हुए इसकी पहचान कर ले। दुनिया तत्त्व की खोज तो नहीं करती। व्यर्थ में वाद-विवाद में उलझ करके अपने समय एवं जीवन को बर्बाद कर देती है। वाद-विवाद करते हुए तो राक्षस मारे गये। जिस प्रकार से फूलों पर बैठे भंवरे।

हे चारणी! भेरी-नगाड़ा आदि बाजे तो ज्यादा दूर तक सुनाई नहीं देते। ज्यादा महत्व वाले नहीं हैं। हमारे तो अलौकिक बाजे तो बहुत ही दूर तक सुनाई देते हैं। बहुत ही महत्वपूर्ण एवं सुखदायी हैं। इन्हीं बाजों से नाता जोड़ ले, सांसारिक बाजों से नाता तोड़ ले।

हे चारणी! तुम्हें सद्गुरु के शब्द सुनने चाहिये। ये बड़े ही गुणकारी हैं। सद्गुरु की वाणी झीणी है, तत्त्व को बताने वाली है। जिसके बल का कोई आरपार नहीं है। इस प्रकार के शब्द को श्रवण करके चारणी बिश्नोई पंथ में सम्मिलित हो गयी। उसी के साथ ही उसका सम्पूर्ण परिवार ही बिश्नोई मत में प्रविष्ट हो गया।