रचना 9
गृहस्थ गुरु मन्त्र (सुगरा मन्त्र)
ओम् शब्द गुरु सूरत चेला। पांच तत्व में रहे अकेला।। सहजे जोगी शून्य में वास। पांच तत्व में लियो प्रकाश।। ना मेरे माई ना मेरे बाप। अलख निरंजन आपही आप।। गंगा यमुना बहै सरस्वती। कोई कोई नहावे बिरला यती।। तारक मन्त्र पार गिराम। गुरु बतायो निश्चय नाम।। जो कोई सुमिरै उतरै पार। बहुरि न आवै मैली धार।।