रचना 11छन्द:- जंभ ब्रह्म सनातनजंभ ब्रह्म सनातनं, गुरु एक सच्चित जानियों। जगद्वन्द्य पुरातनं, जगदीश निश्चय भानियो।। जंभ विष्णु विष्णु जंभ जी, यामें भेद न ठानियो। श्रीजंभ गुण गाते हुए, दोषो को निशदिन भानियों।