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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह11 / 18

रचना 11

छन्द:- जंभ ब्रह्म सनातन

जंभ ब्रह्म सनातनं, गुरु एक सच्चित जानियों। जगद्वन्द्य पुरातनं, जगदीश निश्चय भानियो।। जंभ विष्णु विष्णु जंभ जी, यामें भेद न ठानियो। श्रीजंभ गुण गाते हुए, दोषो को निशदिन भानियों।