शब्द 102
ओ३म् विष्णु विष्णु भण अजर जरीजै, धर्म हुवै पापां छूटीजै।
हरि पर हरि को नाम जपीजै, हरियालो हरि आण हरूं, हरिनारायण देव नरूं।
आशा सास निरास भइलों, पाइलों मोक्ष द्वार खिणूं।
एक विश्नोई आय कै, पूछै भेद विचार।
बेटा बेटी कुटुम्ब सूं, मोह न छूटै लिंगार।