मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह
शब्द 102 / 120

छपय

एक विश्नोई आय कै, पूछै भेद विचार।

बेटा बेटी कुटुम्ब सूं, मोह न छूटै लिंगार।

शब्द 102

ओ३म् विष्णु विष्णु भण अजर जरीजै, धर्म हुवै पापां छूटीजै।

हरि पर हरि को नाम जपीजै, हरियालो हरि आण हरूं, हरिनारायण देव नरूं।

आशा सास निरास भइलों, पाइलों मोक्ष द्वार खिणूं।