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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 104 / 120

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विश्नोई बिजनौर को, अर्ज करी उण आय।

छै धड़ी सोनों तबै, चाड़रू लागे पाय।

शब्द 104

ओ३म् कंचन दानों कछु न मानूं, कापड़ दानूं कछु न मानूं। चोपड़ दानूं कछु न मानूं, पाट पटंबर दानूं कछु न मानूं।

पंच लाख तुरंगम दानूं कछु न मानूं, हस्ती दानूं कछु न मानूं। तिरिया दानूं कछु न मानूं, मानूं एक सुचील सिनानूं।