शब्द 11
ओ३म् दिल साबत हज काबो नैड़ै, क्या उलबंग पुकारो।
सीने सरवर करो बंदगी, हक्क निवाज गुजारो।
इंहि हैड़ै हर दिन की रोजी, तो इस ही रोजी सारों।
आप खुदाय बंद लेखौ मांगै, रे वीन्है गुन्है जीव क्यूं मारो।
थे तक जाणों तक पीड़ न जांणो, विन परचै वाद निवाज गुजारो।
चर फिर आवै सहज दुहावै, जिसका खीर हलाली। तिसके गले करद क्यूं सारौ, थे पढ़ सुण रहिया खाली।
थे चढ़ चढ़ भींते मड़ी मसीते, क्या उलबंग पुकारो। कारण खोटा करतब हीणा, थारी खाली पड़ी निवाजूं।
किहिं ओजूं तुम धोवो आप, किहिं ओजूं तुम खण्डा पाप। किहिं ओजूं तुम धरो धियान, किहिं ओजूं चीन्हों रहमान।
रे मुल्ला मन मांही मसीत नमाज गुजारिये, सुणता ना क्या खरै पुकारिये।
अलख न लखियो खलक पिछाण्यो, चांम कटै क्या हुइयो।
हक हलाल पिछाण्यों नांही, तो निश्चै गाफल दोरै दीयो।