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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 12 / 120

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फिर यो काजी बोलियो, फरमाई यह मुहमद।

जम्भगुरु तब यों कही, इसका सुणियो सबद।

शब्द 12

ओ३म् महमद महमद न कर काजी, महमद का तो विषम विचारूं।

महमंद हाथ करद जो होती, लोहै घड़ी न सारूं।

महमद साथ पयंबर सीधा, एक लख असी हजारूं।

महमद मरद हलाली होता, तुम ही भये मुरदारूं।