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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 114 / 120

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जाट जमाती आय कै, गुरु के लागा पाय।

क्रिया धर्म जांणो नहीं, थूल जू वचन सुणाय।

शब्द 114

ओ३म् सुर नर तंणो सन्देशो आयो, सांभलियो रे जाटों। चांदणै थकै अंधेरे क्यों चालो, भूल गया गुरु वाटो।

नीर थकै घट थूल क्यूं राखो, सबल बिगोवो खाटो। मागर मणिया क्यूं हाथ बिसाहो, कांय हीरा हाथ उसाटो।

सुर नर तंणो संदेशो आयो, सांभलियो रे जाटों।