मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह
शब्द 113 / 120

छपय

मुला सधारी यूं कहै, महंमद ही फुरमान।

रोजे रखे निवाज पढ़े, बंदगी करै साहब तेहि मान।

शब्द 113

ओ३म् ईमा मोमण चीमा गोयम, महंमद फुरमानी।

उरका फुरका निवाज फरीजा, खासा खबर विनाणी।

इला रास्ती ईमा मोमन, मारफत मुल्लाणी।