शब्द 112
ओ३म् जंके पंथ का भाजणा, गुरु का नींदणा, स्वामी का दुस्मणा। कुफर ते काफरा, कुमली कुपातूं, कुचीला कु धातूं।
हड़ हड़ा भड़ भड़ा, दाणवै दूतबा, दाणवै भूतबा। राकसा बोकसा, जाका जन्म नहीं पर कर्म चंडालूं।
और कूं जिभै कर आप कूं पोखणा, जिहि की रूवां ले दीजैसी। दौरै घूंप अंधारौ, तानबे तानबा, छानबे छानबा। तोड़बै तोड़बा, कूकबै पूकारबा, जाकी कोई न करबा सारूं।