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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 111 / 120

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झाली राणी पूछियो, देव तणें दरबार।

अयोध्या में आनन्द घणां, सुखी किसो किरतार।

शब्द 111

ओ३म् खरड़ ओढ़ीजै, तूंबा जीमीजै, सुरहै दुहीजै। त खेत की सींव म लीजै, पीजै ऊंडा नीरूं।

सुर नर देवा बंदी खाने, तित उतरिया तीरूं। भोलब भालब टोलम टालम, ज्यूं जाणों त्यूं आणों।

मैं वाचा दई प्रहलादा सूं, सुचेलो गुरु लाजै। कोड़ तेतीसूं बाड़े दीन्ही, तिनकी जात पिछाणों।