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गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह
शब्द 116 / 120

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जोगी सब भेला हुआ, आया मारूं देश।

भस्मी रमाई देह में, लम्बे बढ़ाया केश।

शब्द 116

ओ३म् आयसां मृगछाला पावोड़ी कांय फिरावों,मतूंत आयसां ऊगंतो भांण थंभाऊं। दोनों परबत मेर उजागर, मतूंत अध बिच आन भिड़ाऊं।

तीन भवन की राही रूक्मण, मतूंत थलसिर आंण बसाऊं। नवसै नदी निवासी नाला, मतूंत थलसिर आन बहाऊं।

सीत बहोड़ी लंका तोड़ी, ऐसो कियो संग्रामूं। जां बाणै म्हें रावण मार्यो, मतूंत कोवड सोखा हाथे सांह।

आयसां! मृगछाला पावोड़ी कांय फिरावो, मतूंतो उगंतो भाण थंभाऊं।