मुख्य सामग्री पर जाएँ
गुरु जम्भेश्वर भगवान
संग्रह
शब्द 117 / 120

छपय

जोगी तब ऐसे कही, सुनो स्वामी जी बात।

जोग सिद्धि हम भी लई, सतगुरु केरे पास।

शब्द 117

ओ३म् टूका पाया मगर मचाया, ज्यूं हंडियाया कुता।

जोग जुगत की सार न जांणी, मूंड मुंडाय बिगूता। चेला गुरु अपरचै खीणां, मरते मोक्ष न पायो।