शब्द 117भावार्थ देखेंओ३म् टूका पाया मगर मचाया, ज्यूं हंडियाया कुता।जोग जुगत की सार न जांणी, मूंड मुंडाय बिगूता। चेला गुरु अपरचै खीणां, मरते मोक्ष न पायो।