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गुरु जम्भेश्वर भगवान
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शब्द 118 / 120

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विश्नोवण एक बाल ले, आई सतगुरु पास।

बालक मुख बोले नहीं, मन में घणी उदास।

शब्द 118

ओ३म् सुरगां हूंते शिम्भूं आयो, कहो कुणां के काजै। नर निरहारी एक लवाई, परगट जोत विराजै।

प्रहलादा सूं वाचा कीवी, आयो बारां काजै। बारां मैं सूं एक घटै तो, सू चेलो गुरु लाजै।